आगरा। मेट्रो के निर्माण और संचालन के लिए प्रोजेक्ट के दौरान 2729 पेड़ों का कत्ल किया जाएगा। हरियाली के इस कत्ल के लिए मेट्रो कारपोरेशन महज 1.24 करोड़ रुपये ही चुकाएगा, यानी हर पेड़ के लिए महज 4543 रुपये। ताजमहल से महज 505 मीटर दूर पीएसी डिपो में जो पेड़ काटे जाएंगे, उसके एवज में हरियाली विकसित करने को मेट्रो 91 लाख और कालिंदी विहार में 33 लाख रुपये ही चुकाएगा।
16.3 हेक्टेयर में बनने वाले मेट्रो के पीएसी डिपो में 1226 और 11.9 हेक्टेयर में प्रस्तावित कालिंदी विहार डिपो के लिए 154 पेड़ काटे जाएंगे। कुल प्रोजेक्ट में रूट आदि मिलाकर 2729 पेड़ों का कत्ल किया जाएगा।
ताजमहल के पास इतनी बड़ी संख्या में पेड़ काटने का क्या असर होगा, इसके लिए डीपीआर में इकोलोजिकल स्टडी कराने की संस्तुति की गई है, लेकिन पर्यावरणविदों का मानना है कि माल रोड पर एक हजार पेड़ काटने के बाद अब मेट्रो के लिए पीएसी डिपो में इतनी बड़ी संख्या में पेड़ काटने से ताजमहल पर बुरा असर पड़ेगा।
इस क्षेत्र की पर्यावरण संतुलन ही बिगड़ जाएगा। पूर्वी गेट पर जहां ताज नेचर वॉक और पश्चिमी गेट पर शाहजहां गार्डन पर हरियाली है, वहीं दक्षिणी गेट की ओर सर्किट हाउस और पीएसी मैदान पर ही इतनी बड़ी संख्या में पेड़ हैं जो धूलकणों और प्रदूषक तत्वों को रोकते हैं।
ताज ट्रिपेजियम जोन (टीटीजेड) में 2729 पेड़ काटने से हर साल वायुमंडल को गहरा नुकसान पहुंचेगा। ताजमहल के शहर में इन पेड़ों को काटने से हर साल 1.33 लाख किग्रा आक्सीजन की कमी वातावरण में हो जाएगी और 59,492 किग्रा कार्बन डाइक्साइड सोखी नहीं जा सकेगी।
50 से 100 साल पुराने इन पेड़ों को काटने से यह दोहरा नुकसान होगा। इसके अलावा ताज के पास धूल कणों, हाइड्रो कार्बन में बढ़ोतरी के साथ इस क्षेत्र में पेड़ काटने से नमी भी कम रह जाएगी। मेट्रो के भूमिगत स्टेशनों के निर्माण के लिए जो खोदाई की जाएगी, उसमें हर दिन 48 ट्रक मिट्टी निकाली जाएगी।
राइट्स द्वारा तैयार की गई मेट्रो की फाइनल डीपीआर के मुताबिक यह ट्रक हर दिन 20 किमी की दूरी तय करेंगे। ऐसे में 960 किमी प्रति दिन के फेरे ट्रकों के होंगे जो रास्ते में मिट्टी ले जाने के कारण धूल भी फैलाएंगे। मिट्टी की खोदाई और ट्रकों से ले जाने के कारण हर दिन 2.2 किग्रा धूल, 2.69 किग्रा कार्बन मोनोक्साइड और 4.8 किग्रा नाइट्रोजन डाइक्साइड वातावरण में घुलेगी।
मेट्रो निर्माण के दौरान पांच सालों तक प्रदूषण स्तर कैसा रहेगा, यह जानने के लिए डीपीआर में एयर क्वालिटी के लिए 8 जगह मानीटरिंग प्रस्तावित है, जहां महीने में दो बार आंकड़े लिए जाएंगे।
ध्वनि प्रदूषण के लिए 8 केंद्रों पर सप्ताह में एक बार, बाइव्रेशन की जांच सप्ताह में एक बार, जल प्रदूषण की जांच 8 जगहों पर सीजन में एक बार और मृदा प्रदूषण की जांच आठ जगहों पर सीजन में एक बार किए जाने का प्रस्ताव है।