आगरा। फव्वारा स्थित वरदान मेडिकल एजेंसी पर तीन दिन तक चली जांच में बिना बिल के दवाओं की कालाबाजारी का खेल सामने आया है। एजेंसी संचालक तीन अन्य राज्यों से बिना बिल से दवाओं की खरीद कर मोटे मुनाफे पर बिक्री करता था। इसमें दो दवाएं नकली होने की भी आशंका है। संचालक को नोटिस देकर बीते दो साल की दवाओं की खरीद-बिक्री के बिल तलब किए गए हैं।
सहायक आयुक्त औषधि अतुल उपाध्याय ने बताया कि लखनऊ से नकली, बिना बिल और सरकारी दवाओं की कालाबाजारी का इनपुट मिलने पर वरदान मेडिकल एजेंसी पर छापा मारकर तीन दिन तक जांच की गई। इसमें 23 तरह की दवाएं बिना बिल के मिलीं। एजेंसी के संचालक अंकुर अग्रवाल से पूछताछ में पता चला कि वह दिल्ली, मध्यप्रदेश के भोपाल-ग्वालियर, उत्तराखंड के देहरादून और उत्तर प्रदेश के सहारनपुर समेत अन्य जिलों से बिना बिल के दवाएं खरीदता है। बिना बिल के दवाएं कम कीमत पर मिलती हैं जिसकी बिक्री करने पर मोटा मुनाफा मिलता है।
इनमें से पेट की जलन कम करने की दवा और खून बढ़ाने का इंजेक्शन नकली प्रतीत हो रहा है। ये नामी कंपनी की दवाएं हैं। उन्होंने बताया कि यहां से खून बढ़ाने के 180 इंजेक्शन जब्त किए गए हैं। एक इंजेक्शन की कीमत करीब 3800 रुपये है। इन राज्यों के संबंधित जिले के औषधि विभाग के अधिकारियों को दवाओं के नाम, बैच नंबर समेत अन्य जानकारी देकर इनकी जांच करने के लिए रिपोर्ट भेज रहे हैं।
8 लाख की दवाएं जब्त, सरकारी दवाएं भी मिलीं
वरदान मेडिकल एजेंसी पर छापे के दौरान तीन दिन में 8 लाख रुपये की दवाएं जब्त की हैं। ये पांच कार्टन दवाएं हैं, जिसमें मधुमेह, उच्च रक्तचाप, एंटीबायोटिक समेत अन्य हैं। कर्मचारी राज्य बीमा अस्पताल की भी दवाएं मिलीं, जिनको संचालक ने ग्वालियर से मंगवाने की बात कही। इसकी भी जांच की जा रही है।
लखनऊ की पांच सदस्यीय टीम करेगी जांच
सहायक आयुक्त औषधि ने बताया कि नकली, सरकारी और बिना बिल के दवाओं की कालाबाजारी कई राज्यों से जुड़ी होने पर मुख्यालय गंभीर है। ऐसे में पांच सदस्यीय टीम बनाई है। इसमें लखनऊ के अधिकारी शामिल हैं। स्थानीय अधिकारी इनकी जांच में सहयोग करेंगे। नकली दवा और नारकोटिक्स श्रेणी की दवाओं की तस्करी के संदर्भ में उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में रैकेट संचालित हैं, इसको पकड़ने के लिए औषधि विभाग, एसटीएफ समेत अन्य एजेंसी जांच कर रही हैं।