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आगरा: परचून की दुकान पर हो रही थी बुखार-खांसी की दवा और प्रतिबंधित इंजेक्शन की बिक्री, दुकानदार पर दर्ज होगा मुकदमा

Sat, 07 May 2022 01:33 PM IST
मुकेश कुमार अमर उजाला ब्यूरो, आगरा

सार

औषधि विभाग और खाद्य सुरक्षा विभाग ने शुक्रवार को खेरागढ़ के जिंदल जनरल स्टोर पर छापा मारा। दुकान पर अवैध रूप से दवाएं बेची जा रही थीं। टीम ने 16 हजार रुपये की दवाएं जब्त की हैं। 
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परचून की दुकान पर बिक रही थीं दवाएं - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आगरा में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) की टीम ने खेरागढ़ में परचून की दुकान पर पशुओं के प्रतिबंधित ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन और बुखार, खांसी समेत 11 तरह की दवाएं बिकती हुईं पकड़ीं। दुकान से करीब 16000 रुपये की दवाएं और इंजेक्शन जब्त किए गए हैं। संचालक को नोटिस दिया है। मुकदमा दर्ज किया जाएगा। जांच के लिए दो दवाओं के नमूने भी लिए हैं।

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औषधि निरीक्षक राजकुमार शर्मा ने बताया कि मुखबिर की सूचना पर खेरागढ़ के पीपलखेड़ा स्थित जिंदल जनरल स्टोर पर छापा मारा। मौके पर संचालक रामनिवास मिला। दुकान की जांच करने पर पशुओं के प्रतिबंधित ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन के 7 पैकेट मिले। एक पैकेट में 100 इंजेक्शन थे। पैकेट पर कीमत 60 रुपये अंकित थी। निर्माता कंपनी आनंद फार्मा कानपुर दर्ज था। कंपनी को नोटिस देकर जवाब तलब किया जाएगा। 

अवैध रूप से हो रही थी दवाओं की बिक्री 

उन्होंने बताया कि दुकान में एंटीबायोटिक दवा, खांसी बुखार की सिरप, दवा, दर्द निवारक दवाएं, बुखार खांसी की दवा समेत पेट में दर्द समेत 11 तरह की दवाएं भी मिली हैं। संचालक से उनकी बिक्री का लाइसेंस मांगा तो वह दिखा नहीं पाया। दुकान संचालक अवैध रूप से दवा और इंजेक्शन की बिक्री कर रहा था। इन सभी दवा और इंजेक्शन को जब्त कर लिया है। इनकी कीमत करीब 16000 रुपये है। दो संदिग्ध दवाओं के नमूने जांच के लिए लैब भेज जा रहे हैं। नोटिस देते हुए आरोपी दुकानदार के खिलाफ औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम 1940 की धारा 22 के तहत कोर्ट में मुकदमा दायर किया जाएगा।

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दो रुपये के हिसाब से ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन की बिक्री

ड्रग इंस्पेक्टर कपिल शर्मा ने बताया कि दुकानदार रामनिवास से ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन के बारे में पूछा तो उसने बताया कि दवा प्रतिनिधि से पैकेट खरीदता है और प्रति इंजेक्शन दो रुपये में बिक्री करता है। इसका उपयोग पशुपालक पशुओं से अधिक दूध निकालने के लिए उपयोग करते हैं। पशुओं पर इस इंजेक्शन के दुरुपयोग से लोगों के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंच रहा है। इन पशुओं का मांस खाने पर गिद्ध प्रजाति लगभग खत्म ही हो गई है।
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