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दवा ही बनी सबसे बड़ा मर्ज

Thu, 15 Oct 2015 01:54 AM IST
ब्यूरो अमर उजाला, आगरा
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आगरा फार्मा एसोसिएशन की हड़ताल से मरीजों-तीमारदारों के लिए बुधवार को दवा ही सबसे बड़ा मर्ज बन गई। यह हाल शहर और देहात के मुख्य बाजारों समेत दवा की अधिकांश दुकानें बंद रहने से हुआ। सबसे ज्यादा परेशानी वायरल फीवर के मरीजों को उठानी पड़ी। डाक्टर को दिखाने के बाद पर्चा लेकर भटकते रहे। आखिरकार बिना दवा लौटना पड़ा। इधर ई-फार्मेसी और फार्मासिस्ट की अनिवार्यता का विरोध कर रहे एसोसिएशन ने दवा की दुकानों के आनलाइन पंजीकरण प्रक्रिया सरल करने की मांग भी दोहराई।
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अखिल भारतीय केमिस्ट एसोसिएशन के आह्वान पर आगरा फार्मा ने बंद सफल बनाने के लिए दस टीमें बनाई थीं। इन टीमों ने फव्वारा, बेलनगंज, बुंदू कटरा, लोहामंडी, जयपुर हाउस, दिल्ली गेट, बाग फरजाना, ट्रांस यमुना कालोनी, बल्केश्वर, रामबाग, सिकंदरा, शहीद नगर, राजपुर चुंगी के अलावा देहात के खेरागढ़, सैंया, फतेहपुर सीकरी, अछनेरा, किरावली, फतेहाबाद, शमसाबाद आदि क्षेत्रों में भ्रमण कर दवा विक्रेताओं से दुकानें बंद रखने की अपील की। कुछ स्थानों पर टीमों का विरोध भी हुआ।
बाद में एसोसिएशन के सदस्य धाकरान चौराहे से पैदल मार्च करते कलक्ट्रेट पहुंचे। डीएम की अनुपस्थिति में प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम तीन सूत्रीय मांग पत्र उनके कार्यालय में रिसीव कराया। एसोसिएशन के महामंत्री महेश अग्रवाल ने बताया कि यह हड़ताल दवा विक्रेताओं के हितों की रक्षा का प्रयास था, जो सफल रहा। प्रदर्शन में अध्यक्ष महेश सिंघल, ओमप्रकाश, संजीव गुप्ता, नीरज वर्मा, जगदीश राठी, अनूप बंसल, मेघराज दियालानी, मनोज सक्सेना, राजीव कुलश्रेष्ठ आदि शामिल रहे। बंदी को जिला आगरा केमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष आशू शर्मा का भी समर्थन रहा।
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खुली दुकानें बनीं सहारा
बंदी के आह्वान के बाद भी शहर की विभिन्न क्षेत्रों में इक्का-दुक्का दुकानें खुली रहीं। दवा खरीदने को भटक रहे मरीजों को इनसे थोड़ी राहत मिली। स्टोर खुले होने की जानकारी पर मरीजों ने उधर ही रुख किया। इससे इन दुकानों पर भारी भीड़ रही।
अन्य संगठनों ने बताया विफल
फार्मा एसोसएिशन बंदी की सफलता के दावे कर रहा है, वहीं बंद में शामिल न हुए दवा विक्रेताओं के दूसरे संगठनों ने इसे विफल बताया। मेडिकल ट्रेडर्स वेलफेयर एसोसिएशन के महामंत्री पुनीत कालरा ने बताया कि इन संगठनों के अधिकांश सदस्यों की दुकानें खुली रहीं। उन्हें जबरदस्ती बंद कराने के प्रयास का कड़ा विरोध हुआ। केमिस्ट एंड डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन के उपाध्यक्ष गिरधारीलाल भग्त्यानी और आगरा महानगर केमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष आशीष शर्मा ने भी हड़ताल को विफल बताया है।
नहीं थी हड़ताल की जानकारी
दवा लेने के लिए गांव से आया, यहां आकर हड़ताल होने की बात पता चली। मैं कई जगह गया, लेकिन दवा नहीं मिली।
-रवि कुमार, सैंया
नोट: इनका फोटो सीएम भाईसाहब सेव करेंगे
बेटे को बुखार आ रहा है। डाक्टर को दिखाया, दवा लिख दी। बाग फरजाना में दुकानें बंद थीं, फव्वारे आया, यहां भी वही हाल था।
-प्रदीप, इरादत नगर
फार्मेसिस्ट एसोसिएशन ने जताया विरोध
डिप्लोमा फार्मेसिस्ट एसोसिएशन ने आगरा फार्मा की केमिस्ट रजिस्ट्रेशन में फार्मेसिस्ट की अनिवार्यता खत्म करने का कड़ा विरोध किया है। जिला अस्पताल परिसर में फार्मेसिस्ट एसोसिएशन के प्रांतीय अध्यक्ष जितेंद्र जैन ने मीडिया को बताया कि ड्रग एंड कास्मेटिक एक्ट 1945 और फार्मेसी एक्ट 1948 के तहत रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट ही दवा का क्रय-विक्रय कर सकता है। जिलाध्यक्ष महेश बघेल ने कहा कि ऐसा इसलिए है कि प्रशिक्षित फार्मासिस्ट ही दवा संबंधी सही जानकारी रखते हैं। वार्ता के दौरान राजीव उपाध्याय, आरएस राना, बीके वार्ष्णेय, धर्मेंद्र सिंह, हर्षकुमार, एसपी सिंह, टीएन त्यागी भी मौजूद रहे।
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