मैनपुरी। मैं डॉक्टर कार्तिक गुप्ता बोल रहा हूं... मेरी भारत के प्रधानमंत्री से अपील है कि वह यूक्रेन में फंसे भारतीय छात्रों को सुरक्षित देश लाने की व्यवस्था करें। यहां छात्रों का जीवन संकट में है। आकाश में मिसाइलों की चमक और धमाकों की गड़गड़ाहट के चलते बाहर निकलना मुश्किल हो रहा है। कुछ इसी तरह कार्तिक ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए शनिवार को आपबीती सुनाई।
बेवर के मोहल्ला महाजन निवासी व्यापारी रामजी गुप्ता का बेटा कार्तिक गुप्ता यूक्रेन के शहर खारकीव में फंसा हुआ है। परिजनों से उसकी प्रत्येक एक घंटे पर बात हो रही है। कार्तिक ने परिजनों को बताया कि उसने युद्ध शुरू होते ही एक सप्ताह के भोजन आदि की व्यवस्था की थी। उसके अन्य साथियों ने भी यही किया है। सभी साथी शिक्षकों के साथ खारकीव में कॉलेज में बने बंकर में ही छुपे हुए हैं। रूस द्वारा खारकीव शहर पर भी हमला किया गया है। वे लोग इन हालातों में बंकर से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। कार्तिक ने बताया कि उसके शिक्षकों के अनुसार अगले सप्ताह उसकी टिकट हो सकती है। फिलहाल परिजन कार्तिक को लेकर परेशान हैं। कार्तिक प्रधानमंत्री से अपील की है कि उसे और उसके अन्य भारतीय साथियों को वापस भारत लाने की व्यवस्था की जाए।
दो दिन से स्नेहा को नहीं मिल सका है भोजन-पानी
शहर के मोहल्ला पंजाबी कॉलोनी निवासी देवेश यादव की पुत्री एमबीबीएस प्रथम वर्ष की छात्रा स्नेहा यादव हवाई पट्टी से वापस अपने ल्वीव स्थित अपने हॉस्टल पहुंच गई है। स्नेहा के नाना शिवराज सिंह यादव ने बताया कि उनकी स्नेहा से लगातार बात हो रही है। स्नेहा हवाई पट्टी पर जा रही थी कि रास्ते में मिसाइल हमला होने के कारण वह दो दिन से रास्ते में ही फंसी थी। शनिवार की सुबह वह वापस अपने हॉस्टल पहुंची। स्नेहा ने मिसाइल हमला काफी नजदीकी से देखा है, इसलिए वह भयभीत हैं। शिवराज सिंह ने बताया कि स्नेहा को दो दिन से भोजन और पानी की उचित व्यवस्था नहीं हो सकी है। उनकी सरकार से मांग है कि बेटी को शीघ्र वापस लाया जाए।
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हॉस्टल में साथियों के साथ चिंतित हैं अवनीश राठौर
शहर के मोहल्ला देवपुरा निवासी नरेंद्र सिंह राठौर का पुत्र अवनीश राठौर यूक्रेन की राजधानी कीव में ही फंसे हैं। शनिवार को अवनीश राठौर की अपने परिजन से कई बार बात हुई। अवनीश ने परिजनों को बताया कि वह सुरक्षित है। साथियों और उसके पास अगले एक सप्ताह तक का पर्याप्त भोजन है। फिलहाल वह प्रयास कर रहा है कि कैसे भी वह भारत वापस आए। इसके लिए उसके शिक्षक आदि भी एयर टिकट के लिए व्यवस्था में जुटे हुए हैं। नरेंद्र राठौर ने बताया कि उनकी बेटे से कई बार बात हुई है। वह साथियों सहित सुरक्षित है और उसे खाने-पीने का सामान भी मिल रहा है।
स्वदेश लौटने के लिए पांच डिग्री तापमान में कुशाग्र ने काटी रात
करहल के सिरसागंज रोड निवासी रनवीर सिंह यादव का बेटा कुशाग्र यादव यूक्रेन के ल्वीव शहर में ही फंसा हुआ है। शुक्रवार की शाम उसे उसके शिक्षकों द्वारा बताया कि उसे और उसके साथियों को पड़ोसी देश भेजा जाएगा। रात में उन्हें पड़ोसी देश भेजे जाने के नाम पर खुले में रोका गया। यहां पांच डिग्री तापमान में उन लोगों ने रात काटी, लेकिन अंत में बताया गया कि सभी बार्डर सील हो गए हैं। अब कहीं नहीं भेजा जा सकता। कुशाग्र ने बताया कि वह सुबह होते ही फिर से वापस अपने कॉलेज के बंकर में आ गया है। यहां वह साथियों सहित मौजूद है। कुशाग्र ने परिजनों को बताया कि बंकर में भोजन पानी की भी उचित व्यवस्था नहीं है।
बंकर में सांस लेने में भी आ रही हैं दिक्कतें
करहल की अहिंसा कॉलोनी निवासी अनुपम यादव यूक्रेन की राजधानी कीव से 600 किमी दूरी पर स्थित अपने कॉलेज के हॉस्टल में ही फंसा हुआ है। शनिवार को परिजनों से हुई बात में अनुपम ने बताया कि आसपास हमला हो रहा है, जिसके चलते वो अपने साथियों के साथ कॉलेज के बंकर में ही मौजूद है। बंकर के अंदर सांस लेने में भी दिक्कत आ रही है। भोजन और पानी की भी उचित व्यवस्था नहीं है। कॉलेज के मैनेजमेंट द्वारा पहले उसे स्वदेश भेजने की व्यवस्था करने की बात कही गई थी लेकिन अब कोई ठोस जवाब नहीं मिल रहा है।
साथियों सहित दहशत में दिन काट रही हैं कोयना
कस्बा के सदर बाजार निवासी सतीश यादव की पौत्री कोयना भी यूक्रेन के ल्वीव शहर में फंसी हुई हैं। कोयना की शनिवार को परिजनों से कई बार बात हुई। कोयना के परिजन ने बताया कि वह अपने साथियों सहित अपने स्कूल के हॉस्टल में ही मौजूद हैं। उसे पहले बताया गया था कि उसे पड़ोसी देश भेजा जाएगा जहां से वह भारत पहुंच जाएगी। लेकिन अब स्कूल प्रबंधक कुछ नहीं बता पा रहे हैं। कुछ भी पता नहीं चल पा रहा है कि हम घर कब पहुंचेंगे। हम लोग यहां से निकलना चाहते हैं। कोयना के परिजनों ने भारत सरकार से बेटी को भारत बुलाने की अपील की है।