स्वागत द्वार की चोटी पर फहराया ध्वज
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जानें मंदिर का इतिहास
मंदिर महंत गोविंद उपाध्याय के अनुसार प्राचीन काल में जहां मंदिर है, यहां एक सरकारी चौकी हुआ करती थी। यहां लंगड़ा चौकीदार तैनात था। वह भगवान श्रीराम का भक्त था। एक दिन वह अपनी ड्यूटी पर नहीं था, किसी ने उसकी शिकायत कर दी।
कोतवाल पता करने गया तो चौकीदार श्रीराम कथा में मौजूद था। वह वापस लंगड़े की चौकी वाले स्थान पर आया तो वहां भी वह चौकीदार मिल गया। चौकीदार से पूछे जाने पर उसने बताया कि यहां हनुमान जी ड्यूटी कर रहे थे। इसके बाद यहां मंदिर का निर्माण कराया गया। जिसका नाम लंगड़े चौकीदार के नाम पर रखा गया।