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Budget 2024: बजट में क्या मथुरा के साड़ी उद्योग को लगेंगे पंख, उद्यमियों को ये उम्मीद; 23 जुलाई का इंतजार

Fri, 19 Jul 2024 03:26 PM IST
धीरेन्द्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा

सार

मोदी 3.0 सरकार का बजट 23 जुलाई को पेश होने जा रहा है। इस बजट से हर सेक्टर को खास उम्मीद है। मथुरा के उद्यमियों ने कहा कि सब्सिडी पर मिले पीएनजी तो साड़ी उद्योग रफ्तार पकड़ेगा। 

 
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साड़ी उद्योग का फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मथुरा के पारंपरिक साड़ी उद्योग को 23 जुलाई को मोदी 3.0 सरकार द्वारा पेश किए जाने वाले बजट से खासी उम्मीद है। उद्यमियों को उम्मीद है कि सरकार इस बजट में टीटीजेड के नियमों में राहत देने और उद्यमियों के लिए टेक्सटाइल पार्क की स्थापना मथुरा में करने सहित पीएनजी सब्सिडी दरों पर उपलब्ध कराने का एलान करे। यह उद्योग मथुरा को विश्व पटल पर पहचान दिलाने के लिए आतुर खड़ा है। 80 वर्ष पुराने इस उद्योग की पहले 100 से अधिक यूनिट थीं। वर्तमान में 45 यूनिट ही रह गईं हैं। 1.50 लाख लोगों के रोजगार पर संकट के बादल हैं।
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साड़ी उद्योग के संरक्षक राजेश बजाज ने बताया कि मथुरा में करीब 80 वर्ष पूर्व साड़ी उद्योग एक छोटे कुटीर उद्योग के रूप में स्थापित हुआ था। मथुरा के टीटीजेड क्षेत्र में आने के बाद इस उद्योग के सामने विकराल समस्या खड़ी हो गई है। टीटीजेड क्षेत्र में ईंधन के रूप में अभी तक उद्यमी बायोफ्यूल का इस्तेमाल कर रहे थे। मगर, प्रदूषण नियंत्रण विभाग द्वारा 2021 के बाद में एनओसी जारी करना बंद कर दिया। पीएनजी/सीएनजी के इस्तेमाल को कहा गया है।

बायोफ्यूल के बजाए गैस जलाने पर साड़ी की लागत कम से कम 20 रुपये बढ़ गई। उस स्थिति में सूरत (गुजरात) में बनने वाली साड़ियों के सामने मथुरा के साड़ी उद्यमी अपना उत्पाद बाजार की प्रतिस्पर्धा में नहीं बेच पा रहे हैं। मथुरा साड़ी उद्योग गरीब महिलाओं के रोजाना पहनने वाली साड़ी बनाता है, जिनकी कीमत 100 से 150 रुपये तक ही है। जैसे की सरकार फिरोजाबाद के चूड़ी उद्यमियों को सब्सिडी की दरों पर पीएनजी उपलब्ध करा रही है। उसी प्रकार मथुरा को भी उपलब्ध कराई जाए।
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साड़ी उद्योग ने रोका मथुरा से युवाओं का जाना
साड़ी उद्योग मथुरा से युवाओं का पलायन रोकने के लिए भी जाना जाता है। जिले में करीब डेढ़ लाख लोग प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से वर्तमान में इससे जुड़े हैं। जो कारीगर सूरत जाकर काम करने को मजबूर थे। वह अपने ही जिले में रोजगार मिलने पर यहां रुक गए। इसके अलावा घर-घर महिलाओं को भी काम मिला।

साड़ी यूनिट संचालक गोविंद मित्तल ने बताया कि मथुरा से ताजमहल 60 किमी दूर है। नीरी और आईआईटी की रिपोर्ट बताती है, इतनी दूरी पर बायोफ्यूल का हवा में प्रदूषण नहीं रहता। एनसीआर के दिल्ली क्षेत्र में सीएनजी/पीएनजी जलाने की अनुमति है। दिल्ली से सटे बाकी एनसीआर क्षेत्र में बॉयोफ्यूल जलाने की अनुमति है। उसी तरह से आगरा टीटीजेड क्षेत्र से 60 किमी दूर मथुरा क्षेत्र में बॉयोफ्यूल जलाने की अनुमति देने का प्रावधान इस बार के बजट में करें।  साड़ी यूनिट संचालक अतुल गर्ग ने बताया कि छाता या कोसीकलां में सरकार एक टेक्सटाइल पार्क का निर्माण कराने का एलान इस बजट में करे। यह एरिया टीटीजेड क्षेत्र से बाहर है। उक्त पार्क में सभी उद्यमियों को अपनी फैक्ट्री शिफ्ट करने की अनुमति दी जाए।
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एक नजर साड़ी उद्योग पर
80 वर्ष पुराना है साड़ी उद्योग
100 यूनिट थी पहले संचालित
45 यूनिट वर्तमान में संचालित
02 हजार करोड़ रुपये का सालाना टर्नओवर
1.50 लाख लोगों को मिल रहा प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष तौर पर रोजगार
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