मथुरा जिले में अलग-अलग थाना क्षेत्र में बरामद गई 11 करोड़ की अवैध शराब की बोतलों पर पुलिस बुलडोजर चलाने वाली है। पुलिस ने अदालत में अर्जी लगाकर थानों में पड़ी इस शराब को नष्ट करने की अनुमति मांगी है।
मथुरा में हरियाणा, दिल्ली, पंजाब और राजस्थान की शराब सबसे ज्यादा पकड़ी जाती है। अगर पुलिस के शराब बरामदगी के चार्ट पर निगाह डालेंगे तो पता चलेगा कि हर रोज बड़ी मात्रा में शराब पकड़ी गई। शराब की बोतलों से भरे ट्रक पकड़े गए।
हालांकि बरामद होने वाली शराब और कागजों में दर्शायी जाने वाली शराब में भी अंतर हो जाता है। क्योंकि बरामद करने वाली भी पुलिस है और फर्द भी पुलिस ही बनाती है। प्रदेश के कई जिलों में बरामदगी में खेल के मामले भी सामने आ चुके हैं। लेकिन पुलिस का दावा है कि पारदर्शी प्रक्रिया के तहत शराब को नष्ट किया जाता है।
छह माह में शराब तस्करी के 235 मुकदमे हुए
1 मार्च से लेकर 6 जून तक पुलिस ने 2 लाख 1 हजार 835 लीटर शराब जब्त की। इसमें 235 मुकदमे दर्ज कराए गए। 79 वाहनों को जब्त किया जो शराब की तस्करी में प्रयोग हो रहे थे। शुक्रवार को ही पुलिस ने 1.10 करोड़ की शराब बरामद की।
शराब को नष्ट करने की यह है प्रक्रिया
दरअसल जब पुलिस शराब बरामद करती है तो उसकी पहचान के लिए आबकारी विभाग की टीम को बुलाया जाता है। वो यह देखते हैं कि शराब कैसी है। यह मान लीजिए कि वही प्रमाणित करते हैं कि यह शराब है। उसके बाद मुकदमा दर्ज करके बरामद शराब को ऑन रिकार्ड लाया जाता है।
उसमें शराब की बोतलों की संख्या से लेकर ब्रांड तक का उल्लेख होता है। अगर कोई पकड़ा जाता है तो उसके बारे में लिखा जाता है। इसके बाद संबंधित थानाध्यक्ष अदालत में अर्जी देकर बरामद शराब को नष्ट करने की अनुमति मांगेगा।
अदालत से अनुमति मिलने के बाद एक कमेटी के समक्ष, जिसमें एक मजिस्ट्रेट, पुलिस अधिकारी, आबकारी विभाग के किसी अफसर की मौजूदगी में शराब को नष्ट कर दिया जाता है। शराब को आमतौर पर आबादी से दूर किसी जंगल में ले जाकर गड्ढा खुदवाकर दबा दिया जाता है।
शराब की बोतलों पर बुलडोजर चलाया जाता है ताकि शराब नष्ट हो जाए। एसएसपी सत्यार्थ अनिरुद्ध पंकज ने बताया कि पूरी कमेटी के समक्ष शराब को नष्ट किया जाता है। जब्त की गई शराब है उसे नष्ट करने के लिए अदालत से अनुमति मांगी गई है।