मथुरा के जवाहरबाग के 43 कब्जाधारियों को अदालत ने तीन-तीन साल के कारावास की सजा सुनाई है, वहीं रामवृक्ष के कमांडर चंदन बोस की पत्नी समेत दो महिलाओं को बरी कर दिया है। यह सजा 15 मार्च 2016 को जवाहरबाग में आलू की खुदाई कर रहे उद्यान कर्मियों के साथ मारपीट करने और उन्हें बंधक बनाने के मामले में हुई है।
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जवाहरबाग पर कब्जा जमाए रामवृक्ष और उसके समर्थकों ने 15 मार्च 2016 को आलू की खुदाई कराने पहुंचे उद्यान विभाग के कर्मचारियों के साथ मारपीट की थी। इतना ही नहीं कब्जाधारियों की भीड़ ने सभी को बंधक भी बना लिया था।
बाद में मौके पर भारी पुलिस फोर्स पहुंची और बंधक कर्मियों और मजदूरों को किसी तरह से मुक्त कराया था। इस मामले में उद्यान विभाग के इंस्पेक्टर रामस्वरूप शर्मा ने रामवृक्ष यादव, चंदन बोस समेत करीब डेढ़ सौ-दो सौ अज्ञात लोगों के खिलाफ सदर बाजार थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। लेकिन पुलिस किसी को गिरफ्तार नहीं कर पाई थी।
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हिंसा के बाद से जेल में बंद हैं सभी
इसके बाद 2 जून 2016 को हुई हिंसा के बाद सभी को गिरफ्तार करके जेल भेजा गया था। तभी से यह लोग जेल में बंद हैं। सोमवार को इस मामले की सुनवाई एसीजेएम द्वितीय सीनियर डिवीजन जहेंद्रपाल सिंह की अदालत में हुई।
कोर्ट ने गवाहों के बयान के बाद 43 कब्जाधारियों को दोषी मानते हुए तीन तीन साल के कारावास की सजा सुनाई है। प्रत्येक पर 2300-2300 रुपये का जुर्माना भी किया गया है।
वहीं, अदालत ने चंदनबोस की पत्नी पूनम बोस और लखीमपुरखीरी निवासी श्यामवती को बरी कर दिया है। हरनाथ और चंदनबोस अदालत में पेश नहीं हुए लिहाजा उन पर निर्णय सोमवार को होगा।