हर तरफ उड़ रहा था गुलाल। बांकेबिहारी के भक्तों ने कभी फूल बरसाए तो कभी रंग। ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में तो रंगीले बादल छा गए थे। होली पर जनजन के आराध्य ने जब भक्तों संग होली खेली तो लगा कि संपूर्ण ब्रह्मांड इस दिव्य दर्शन के लिए मानो ठहर गया। बांकेबिहारी महाराज के गगन भेदी जयकारे लोगों की अटूट श्रद्धा को बयां कर रहे थे।
रंगभरनी एकादशी पर सोमवार शाम की बेला में जनजन के आराध्य ठाकुर बांके बिहारी महाराज ने भक्तों संग होली खेली। 4:30 बजे मंदिर के पट खुलते ही जन समुदाय मंदिर प्रांगण में जयकारे लगाते हुए प्रवेश कर गया।
सेवायतों ने सर्वप्रथम रजत सिंहासन पर स्वेत पोशाक धारण कर विराजमान ठाकुरजी पर स्वर्ण पिचकारी से केसर निर्मित रंग को डालकर वृंदावन में परंपरागत होली का शुभारंभ किया।