कभी यमुना किनारे महायोगी भगवान श्रीकृष्ण ने लीलाएं की थीं, आज वह कालिंदी (यमुना) मथुरा के 35 नालों की गंदगी को अपने आप में समाहित करने को मजबूर है। सुप्रीम कोर्ट, एनजीटी से लेकर साधु-संत भी नाराजगी जता चुके हैं, लेकिन हालात सुधरने के बजाए और बिगड़े हैं।
मथुरा में गुरुवार को यमुना नदी का जलस्तर क्या उतरा, घाट किनारे गंदगी उभर आई। गंदगी को देखकर यमुना भक्तों की आस्था को ठेस पहुंची है। कोरोना कर्फ्यू में वातावरण साफ-सथुरा हो रहा है, लेकिन यमुना नदी का पानी स्वच्छ नहीं हुआ। मथुरा शहर से निकल रहे नालों की गंदगी से यमुना मैली हो रही है। इस गंदगी को रोक पाने में नगर निगम नाकाम साबित हो रहा है।
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करीब दो वर्ष पूर्व प्रारंभ हुई 500 करोड़ रुपये की नमामि गंगे योजना की नालों को टेप (बंद) करने की योजना फिलहाल यमुना प्रदूषण के लिए भारी पड़ती जा रही है। मथुरा-वृंदावन के कुल 35 नालों में से प्रतिदिन 32 नालों का गंदा पानी सीधे यमुना में गिर रहा है। इसमें से तीन नालों की स्क्रीनिंग कर पानी जमुनापार एसटीपी को भेजने का दावा किया जा रहा है। यह सभी नालों का गंदा पानी यमुना के शहरी क्षेत्र से ही गिर रहे हैं, जो लगभग 50 किलोमीटर के सीवर से गुजरते हैं।
यमुना की हालत देख दंग रह गए भक्त
ज्येष्ठ मास के पहले ही दिन जब यमुना जी की मंगला आरती करने पहुंचे भक्त तो यमुना जी की हालत को देखकर दंग रह गए। एनजीटी (राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण) में याची कांतानाथ चतुर्वेदी ने बताया कि पिछले हफ्ते तो यमुना जी का जल करीब पांच से छह सीढ़ी तक चढ़ा था, वह आज एक दम से करीब दस सीढ़ी उतर गया। जिसके कारण घाट पर जमा गंदगी बाहर आ गई।
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नगर निगम और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड यमुना सफाई के नाम पर केवल दिखावा कर रहा है। सुप्रीम कोर्ट में याची गणेश चंद्र चतुर्वेदी, हिंदू वादी नेता ब्रजेंद्र नागर, निगम पार्षद रामदास चतुर्वेदी, दीर्घ विष्णु मंदिर के सेवायत बालकृष्ण चतुर्वेदी, लालकृष्ण चतुर्वेदी, संगठन मंत्री मुरलीधर चतुर्वेदी, तीर्थ पुरोहित समाज के बालकृष्ण बालो बादाम छाप, केदार नाथ, कामेश्वरनाथ चतुर्वेदी आदि ने निंदा कर आंदोलन की चेतावनी दी है।