वृंदावन (मथुरा)। यमुना के डूब क्षेत्र में अवैध रूप से बनी बहुमंजिला इमारतों को अब बाढ़ से बचने का सहारा मिलने जा रहा है। सिंचाई विभाग द्वारा तैयार किए जा रहे बंध (स्टड) कालीदह घाट क्षेत्र में यमुना खादर में हो रहे अवैध निर्माण को जलप्लावन की स्थिति से बचाने में सहायक बनेंगे। इस पर करीब पौने चार करोड़ रुपये की लागत आ रही है।
श्रीराधाकृष्ण की लीला भूमि वृंदावन में यमुना का खादर यहां तक कि डूब क्षेत्र में घर बस चुके हैं। इस अवैध निर्माण को सरकार की विभिन्न नीतियां और कोर्ट के आदेश भी नहीं रोक सके हैं। स्थानीय अफसरों की सांठगांठ से यमुना का खादर आवासीय क्षेत्र में बदल दिया गया है। इन क्षेत्रों में बाढ़ के दौरान भगदड़ मचती है। कालीदह घाट क्षेत्र में सिंचाई विभाग यमुना की धारा पर बंध बना रहा है।
कालीदह घाट और यमुना के बीच करीब आधा किलोमीटर की इस दायरे में बने सैकड़ों अवैध निर्माण को भी इससे बाढ़ से बचाव का सहारा मिलने जा रहा है। सिंचाई निर्माण खंड के बंध यमुना के निरंतर हो रहे कटान को रोकेंगे।
खादर में बिछा दी सीवर
सरकारी मशीनरी यमुना के खादर और डूब क्षेत्र में अवैध रूप से तैयार हो रही कॉलोनियों को पूरी तरह सहयोग करते रहे हैं। विकास प्राधिकरण इस निर्माण पर उफ तक नहीं करता है। हालांकि अवैध निर्माण से जुटी टीमों को इसकी पूरी जानकारी रहती है। जल निगम ने तो यमुना के इस खादर क्षेत्र में सीवर बिछा दी है
कालीदह घाट को संभावित यमुना के कटान के खतरे से बचाने की परियोजना के तहत यह कार्य किया जा रहा है। इसका अवैध निर्माण या खादर में निर्माण से कोई लेना देना नहीं है।
-संजीव तिवारी, सहायक अभियंता, सिंचाई
एनजीटी ने स्पष्ट किया है कि डूब क्षेत्र में किसी भी प्रकार का कोई भी निर्माण न किया जाए। इसी कारण रिवर फ्रंट का काम रुकवाया दिया था। यमुना कटान रोकने के नाम पर यह निर्माण एनजीटी के आदेशों का उल्लंघन है। खादर और डूब क्षेत्र में अवैध निर्माण को सपोर्ट है।
- आकाश वार्ष्णेय, अधिवक्ता एनजीटी