गांव कुरसुंडा में मसरूम की खेती दिखाती महिलाएं व डीएम महेंद्र बहादुर सिंह व अधिकारी
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किशनी। विकासखंड के गांव कुरसंडा में डीएम महेंद्र बहादुर सिंह और सीडीओ ईशा प्रिया समूह की महिलाओं द्वारा पैदा की जा रही मशरूम को देखने पहुंचे। महिला समूह को बंधाई देते हुए डीएम ने कहा कि वह मशरूम की अच्छी पैदावार कर आजीविका चलाएं। उम्मीद है जल्द ही जनपद मशरूम का हब बनेगा। मशरूम की कम लागत व कम मेहनत में अच्छी पैदावार कर समूह की महिलाएं अपनी आजीविका अच्छे से चला सकती हैं।
डीएम ने बताया कि भारत माता आजीविका ग्राम संगठन ने जनपद में सबसे पहले मशरूम की खेती करने का किशनी ब्लॉक ने जो शुरुआत की है वह प्रशंसनीय है। इसमें सबसे बड़ा योगदान सीडीओ का है जिन्होंने मशरूम की खेती कराने के लिए एक प्रशिक्षक से समूह की 150 महिलाओं को प्रशिक्षण दिलवाया। इसके बाद महिलाओं में आत्मनिर्भरता आई और महिलाओं ने अच्छी पैदावार कर दिखा भी दिया कि वे स्वरोजगार हासिल कर सकती हैं।
उन्होंने महिलाओं को श्रमिक कल्याण बोर्ड में पंजीकरण कराने की सलाह दी। सीडीओ ने बताया कि समूह की महिलाओं ने कुल 29 बैग लगाए है जो तैयार भी हो गए हैं। किशनी ब्लॉक के बाद अब दूसरे नंबर पर बेवर ब्लॉक में प्रशिक्षण दिलवाकर मशरूम की खेती समूह की महिलाओं से करवाई जाएगी। एसडीएम किशनी रामसकल मौर्य, एसडीएम सदर ऋषिराज, कृषि उपनिदेशक डीबी सिंह, नायब तहसीलदार अनुभव चंद्रा, डीपीआरओ स्वामीदीन, पीडी कृष्ण कुमार सिंह यादव आदि मौजूद रहे।
प्रशिक्षक ने बताई कैसे होती है पैदावार
प्रशिक्षक चिराग सिंह ने बताया कि एक बैग को मय बीज के तैयार करने में सिर्फ दो सौ रुपये की लागत आती है। इसका बीज छह सौ रुपए किलो आ जाता है। एक बैग में डेढ़ सौ ग्राम से दो सौ ग्राम बीज पड़ता है। बीस दिन में इसकी शुरुआत हो जाती है और 25 दिन में इस फसल को बेचा जा सकता है। यह खेती सबसे कम लागत व कम मेहनत में तैयार हो जाती है।
डीएम की बेटियों ने खरीदी मशरूम
गांव कुरसंडा पहुंचे डीएम के साथ उनका परिवार भी गया था। यहां महिलाओं द्वारा पैदा की गई मशरूम को डीएम की बेटी मिशिका व मायरा ने खरीदकर बिक्री की शुरुआत की। जिलाधिकारी की पत्नी अल्पना प्रकाश ने महिलाओं को बधाई दी।