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Agra News: डीएम की कार के आगे लेटे शहीद के परिजन, बोले- हमें बचा लो, उनके पास हैं बंदूकें

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कलेक्ट्रेट में डीएम की कार के सामने लेटी पीड़ित पिस्ता देवी, उनके पौत्र अमित को हटाते सुरक्षाकर
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आगरा। साहब, हमें न्याय दो... वो तीन-तीन बंदूकें लेकर घूम रहे हैं, हमें मार डालेंगे। 18 महीने से चक्कर काट रहे हैं, क्या शहीद के परिवार के साथ ऐसा ही सुलूक होता है... यह करुण पुकार शहीद की उस बूढ़ी मां की थी, जिसके पैर सिस्टम की बेरुखी से थक चुके थे और अंततः वह इंसाफ के लिए सोमवार को परिवार के साथ जिलाधिकारी की कार के आगे लेट गई थीं।
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कलेक्ट्रेट परिसर में दोपहर करीब दो बजे का समय था। जिलाधिकारी मनीष बंसल कोर्ट का कार्य निपटाकर निकले और बाहर खड़ी सरकारी गाड़ी में बैठने वाले थे कि अचानक शोर मचने लगा। किरावली के पनवारी निवासी शहीद कुंज बिहारी की 65 वर्षीय मां पिस्ता देवी चीखते हुए डीएम की कार के सामने लेट गईं। शहीद की विधवा रेखा, भाई शिव गणेश और भतीजे अमित ने भी गाड़ी को घेर लिया। अचानक हुए इस घटनाक्रम से सुरक्षाकर्मियों के हाथ-पांव फूल गए। आननफानन सभी को कार के आगे से हटाया गया लेकिन उनकी आंखों के आंसू और आक्रोश ने प्रशासन को झकझोर दिया।

पिता वेंटिलेटर पर और परिवार दर-दर भटक रहा

पीड़ित पिस्ता देवी ने रोते हुए बताया कि उनके 72 वर्षीय पति हरीकिशन लकवाग्रस्त हैं और फिलहाल अस्पताल में वेंटिलेटर पर जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं। उनके बड़े पुत्र कुंज बिहारी पुलिस में हवलदार थे, जिनकी 21 मई, 2024 को झांसी में ड्यूटी के दौरान मृत्यु हो गई थी। शहीद का परिवार पिछले 18 महीने से अपनी ही जमीन बचाने के लिए तहसील और थानों की चौखट घिस रहा है। सुनवाई कहीं नहीं हुई। सोमवार को पूरा परिवार आत्मदाह की चेतावनी देने पहुंचा था।
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परिजन का आरोप है कि गांव के उदय सिंह, जुल्मी, शिवशंकर, प्रह्लाद और जितेंद्र ने उनके खेत खसरा सं. 726 में जबरन मुड्डियां लगाकर कब्जा कर लिया है। किरावली तहसील के लेखपाल अनुराग यादव विपक्षियों से मिले हुए हैं। उन्होंने गलत रिपोर्ट लगाकर कब्जा तब्दील करवा दिया है। विपक्षियों के पास तीन लाइसेंसी बंदूकें हैं, जिन्हें लहराकर वे खेत पर आने पर जान से मारने की धमकी देते हैं।

पैमाइश और जांच का आश्वासन

जिलाधिकारी ने पीड़ित पक्ष का प्रार्थनापत्र लिया और उनकी व्यथा सुनी। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से तत्काल जांच कराने और खेत की पैमाइश कराकर समस्या का निस्तारण कराने का भरोसा दिया। इसके बाद परिजन घर लौट गए।
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