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शक, रील और बेस्वाद खाना: छोटी-छोटी बातों पर टूट रहे रिश्ते, अलगाव की कगार पर 10 हजार से ज्यादा शादियां

Sun, 23 Aug 2026 10:19 AM IST
Arun Parashar दुर्गेश चाहर, संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा

सार

सात जन्मों तक साथ देने के वादे के साथ शुरू हुए रिश्ते मामूली बातों पर बिखर रहे हैं। परिवार न्यायालय में 10 हजार से अधिक शादियां अलगाव की कगार पर हैं। काउंसिलिंग में भी सुलह नहीं होने पर मामला कोर्ट तक पहुंच चुका है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
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सात जन्मों का सफर तय करने निकले रिश्ते शक, सोशल मीडिया की रील और रसोई के बेस्वाद खाने जैसी मामूली बातों की भेंट चढ़ रहे हैं। जिन आशियानों में अपनापन और हंसी की गूंज होनी चाहिए, उनकी तकदीर अब परिवार न्यायालय के कमरों और बंद फाइलों में दम तोड़ रही है। छोटी-सी जिद और दरकते भरोसे के बीच आगरा के परिवार न्यायालय में 10 हजार से अधिक शादियां अलगाव और इन्साफ की चौखट पर खड़ी हैं। इनके रिश्ते बचाने का पहला प्रयास परिवार परामर्श केंद्र में होता है जहां काउंसलर्स दोनों को आमने-सामने बैठाकर मतभेद सुलझाते हैं लेकिन बात न बनने पर मामला अदालत की चौखट तक पहुंच जाता है।
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शक के कारण रिश्ते में दरार
मलपुरा निवासी युवती की शादी 2024 में मथुरा में हुई थी। शादी के कुछ दिन बाद ही पति-पत्नी के बीच शक ने जगह बना ली। छोटी-छोटी बातों पर विवाद बढ़ा तो नौबत मारपीट तक पहुंच गई। आखिरकार पत्नी मायके लौट आई और परिवार परामर्श केंद्र में शिकायत की। रिश्ता बचाने के लिए तीन बार काउंसिलिंग हुई लेकिन शक और आरोप-प्रत्यारोप की दीवार नहीं टूटी। समझौते की कोशिशें नाकाम हुईं तो पत्नी ने पति के खिलाफ दहेज उत्पीड़न, घरेलू हिंसा और भरण-पोषण का मुकदमा अदालत में दायर कर दिया।

 

खाने ने घोल दी कड़वाहट
बोदला निवासी युवक की शादी 2018 में शाहगंज निवासी युवती से हुई थी। शादी के कुछ दिन बाद ही पति, पत्नी के हाथ के बने खाने में कमियां निकालने लगा। छोटी-छोटी बातों पर तकरार बढ़ती गई तो पत्नी मायके चली गई। वर्ष 2020 में उसने परिवार परामर्श केंद्र में शिकायत की। कई दौर की काउंसिलिंग के बावजूद दोनों के बीच बात नहीं बनी। आखिरकार मामला अदालत पहुंच गया। पांच साल तक मुकदमा लड़ने के बाद दोनों ने तलाक लेकर अपनी-अपनी राह अलग कर ली।

 

रील से शुरू हुई रार
न्यू आगरा निवासी युवती की शादी 2024 में सिकंदरा में हुई थी। युवती को इंस्टाग्राम पर रील बनाने का शौक था लेकिन पति को उसका यह शौक पसंद नहीं था। इसको लेकर दोनों के बीच अक्सर तकरार होने लगी। एक दिन विरोध पर बात इतनी बढ़ी कि गुस्से में पति ने पत्नी को थप्पड़ मार दिया। इससे आहत पत्नी मायके पहुंची और शिकायत कर दी। परिवार परामर्श केंद्र में रिश्ता बचाने की कोशिश हुई लेकिन दोनों के बीच सहमति नहीं बन सकी। आखिरकार रील के शौक से शुरू हुआ विवाद रिश्ते को अदालत की चौखट तक ले गया।

बढ़ते विवाद, समझौते की कोशिशें
 
वर्ष प्राप्त प्रार्थना पत्र समझौते अनुपात
2024 4,811 1,053 21.9%
2025 5,164 1,494 28.9%
2026 (जुलाई तक) 2,000 करीब 1,000 करीब 50%


 
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परिवार परामर्श केंद्र में दोनों पक्षों की काउंसिलिंग होती है। काउंसलर उन्हें 3 से 5 बार आमने-सामने बैठाकर समझाते हैं। अगर बात नहीं बनती है तो प्राथमिकी की संस्तुति कर दी जाती है। -पूनम सिरोही, एडीसीपी, नोडल अधिकारी, परिवार परामर्श केंद्र

काउंसलर की पहली प्राथमिकता समझौता कराना है। वरना, कानूनी लंबी प्रक्रिया के बाद इतना समय गुजर जाता है कि नतीजा अगर पक्ष में हो जाए तो भी उसका कोई मतलब नहीं रह जाता। -डॉ. अमित गौड़, काउंसलर

जिद छोड़ने से बच सकता है परिवार
पति-पत्नी जिद छोड़कर थोड़ा सामंजस्य बना लें तो रिश्ते बच सकते हैं। अगर बात कोर्ट तक पहुंच जाए तो भी बातचीत से समाधान निकालें। भरोसा खत्म होने पर समझौते की गुंजाइश भी खत्म हो जाती है। -अनूप कुमार शर्मा, अधिवक्ता
 
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