डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय
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डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के बीएड फर्जीवाड़ा में एक के बाद एक परत खुल रही है। मूल्यांकन में परीक्षकों ने भी कारस्तानी की। प्राप्तांक से डेढ़ से दोगुना अंक दे दिए। सेवानिवृत्त जज की जांच में परीक्षकों को भी दोषी बताया है। रिपोर्ट में 18 से अधिक पर कार्रवाई की संस्तुति की है।
परीक्षा समिति में खोला गया रिपोर्ट को बंद लिफाफा
बीएड 2012-13 की जांच में सेवानिवृत्त जज की बंद लिफाफा रिपोर्ट को परीक्षा समिति में खोला गया। इसमें 18 से अधिक को फर्जीवाड़ा में दोषी बताया है। इसमें मूल्यांकन प्रभार में शामिल चार वरिष्ठ प्रोफेसर को मुख्य दोषी बताया है। इन्होंने ही निजी कॉलेजों से मिलीभगत कर कॉपियों में नंबर बढ़वा दिए। इनके फर्जीवाड़े में सहयोग करने वाले परीक्षक, कुलसचिव और कर्मचारी के भी नाम हैं। रिपोर्ट में जिम्मेदारी तय करते हुए उनकी कारस्तानी का विवरण लिखा है। जांच में कॉपियों की जांच करने के बाद छेड़छाड़ की और अंकतालिका में मनमाने अंक दर्ज कर दिए। इसमें प्राप्तांकों पर ओवर राइटिंग की, सैकड़ों अंकतालिका मेें दर्ज अंकों को काटकर नए अंक लिख दिए। कारस्तानी पकड़ में नहीं आए, इसके लिए फोइल और चार्ट भी गायब कर दिए।
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बारीकी से की गई जांच
कुलपति प्रो. आशु रानी ने बताया कि सेवानिवृत्त जज ने बारीकी से जांच की है, इस फर्जीवाड़े में कइयों के नाम हैं। रिपोर्ट पूरी नहीं पढ़ी है। समिति ने कुछ रिकॉर्ड और चार्ट न मिलने की बात कही थी, उनको ये उपलब्ध कराते हुए कुछ और नए बिंदु जांच में शामिल करने के लिए अपील की थी, जिसे स्वीकार कर लिया है। जांच की अंतिम रिपोर्ट मिलने के बाद कार्रवाई तय की जाएगी।