माह-ए-रमजान 25 अप्रैल से शुरू हो सकता है। पवित्र माह का चांद 24 अप्रैल को दिखाई देने की उम्मीद है। लॉकडाउन की वजह से रोजेदारों की दिनचर्या बदली नजर आएगी।
घर-ऑफिस में काम करने वाले मुस्लिम घर में ही इबादत में मशगूल रहेंगे। बाजार बंद होने की वजह से सहरी और इफ्तार का दस्तरख्वान इस बार आम रोजों की तरह से नहीं होगा।
नाई की मंडी, लोहामंडी, नई बस्ती, मंटोला, शहीद नगर, आजम पाड़ा, दरगाह अबुल उल्लाह आदि स्थानों पर जहां पूरी रात चहल-पहल रहती थी। लौहार गली, सिंधी बाजार, किनारी बाजार, जौहरी बाजार, घटिया, माल का बाजार, लोहामंडी में रात को लोग खरीदारी के लिए पहुंचते थे। इस बार ये बाजार सूने रहेंगे।
घर में पढ़ी जाएगी तरावीह
कोरोना संक्रमण की वजह से सभी घरों में रहेंगे। कुरान की तिलावत साथ बैठकर करेंगे। घर में ही तरावीह पढ़ी जाएगी। पहली बार परिवार के सभी सदस्य रोजा इफ्तार और सहरी एक ही समय में करेंगे। खजूर न मिलने पर शिकंजी से काम चलाया जाएगा। - सीमा खान, गृहिणी (वसंत बिहार)
होगी असली आजमाइश
करीब सौ साल में ऐसा पहली बार है जब रोजेदार घरों में नमाज अदा करेंगे। रोजा आजमाइश है। इस बार यह बहुत सख्त होगा। लॉकडाउन में दूध भी नहीं मिल रहा है। ऐसे में सहरी में अगर चाय नहीं मिलेगी तो नींबू पानी से रोजा इफ्तार करेंगे। - डॉ. नसरीन बेगम, विभागाध्यक्ष, उर्दू विभाग, वैकुंठी देवी गर्ल्स डिग्री कॉलेज (गुदड़ी मंसूर खां)
नहीं लेनी पड़ेगी छुट्टी
रमजान के लिए खरीदारी नहीं कर पाएंगे। ड्राई फ्रूट और दूध से बने सामान का प्रयोग करेंगे। कई बार तो रोजे के लिए काम से छुट्टी लेनी पड़ती थी। इस बार ऐसा नहीं होगा। - निशाद मिर्जा, फैशन डिजाइनर (कमलानगर)
घरों में नहीं बनेंगे ज्यादा पकवान
सहरी और इफ्तार का दस्तरख्वान इस बार पहले की तरह नहीं होगा। इस बार जो मिलेगा उसी से काम चलाया जाएगा। हर बार रोजे में बाहर निकलकर जकात बांटा करते थे। इस बार घर से आसपास के लोगों की मदद करेंगे। - जीनत जीशान, सामाजिक कार्यकर्ता (फतेहाबाद रोड)
धूप में भागदौड़ नहीं करनी पड़ेगी
हर बार रमजान में इबादत के साथ-साथ बाहर के काम को भी संभालना होता था। कई बार तो धूप में ही टूरिस्ट को घूमना पड़ता था। इस बार घर में रहने की वजह से रोजा रखना थोड़ा आसान होगा। धूप में भागदौड़ नहीं करनी पड़ेगी। - फैजान मलिक, टूरिस्ट गाइड (सुल्तानपुरा, आगरा कैंट)
वर्क शेड्यूल बदल गया
लॉकडाउन की वजह से वर्क शेड्यूल बदल गया है। सुबह शहरी और इबादत के बाद घर के काम निपटाए जाते थे। इसके बाद दीवानी के लिए दौड़ लगाती थी। इस बार घर में रहने की वजह से सहूलियत तो मिलेगी। - असमा अली, वकील (न्यू आगरा)