मार्गशीर्ष पूर्णिमा: बटेश्वर के गौरीशंकर मंदिर में पूजा करते श्रद्धालु
बाह। मार्गशीर्ष पूर्णिमा पर बृहस्पतिवार को बटेश्वर में यमुना स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने सुख-समृद्धि के लिए ब्रह्मलालजी महाराज समेत विभिन्न शिव मंदिरों में पूजन और अनुष्ठान किए।
ज्योतिषाचार्य शिवशरण पाराशर ने बताया कि मान्यता है कि मार्गशीर्ष पूर्णिमा पर स्नान, दान करने से अन्य दिनों की अपेक्षा 32 गुना अधिक फल मिलता है। इसलिए इसे ‘बत्तीसी पूर्णिमा’ भी कहा जाता है। इस दिन व्रत, दान और असहाय व्यक्तियों की सहायता समृद्धि के द्वार खोल देती है। इसी मान्यता के चलते बृहस्पतिवार को बटेश्वर के घाट पर यमुना स्नान के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। यमुना स्नान करने के बाद श्रद्धालुओं की ब्रह्मलालजी महाराज को पूजा। दर्शन-पूजन के लिए लंबी कतार लगी रही। भीड़ अधिक होने की बजह से गौरीशंकर मंदिर में शिव-पार्वती को पूजकर लोगों ने सुख-समृद्धि की कामना की। अन्य शिव मंदिरों में भी दिनभर पूजा अर्चना के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। मंदिर के पुजारी जय प्रकाश गोस्वामी, राकेश वाजपेयी ने बताया कि बृहस्पतिवार को दिनभर विभिन्न शिव मंदिरों में अनुष्ठान हुए। वहीं, बटेश्वर घाट पर दलदल की बजह से यमुना स्नान को नाव और मोटरबोट से श्रद्धालुओं को नदी के दूसरे छोर पर जाना पड़ा। घाट पर नाव में उतरते और चढ़ते समय कई श्रद्धालु हादसे का शिकार होने से भी बचे। कई फिसलकर गिर भी गए।