आगरा में नगर निगम की लापरवाही के चलते शहर की तमाम सड़कों पर अंधेरा छाया रहता है। शहर की करीब 15 हजार स्ट्रीट लाइटें खराब हैं। इनकी मरम्मत के लिए विभाग को शिकायतों का इंतजार है। इसके लिए अभी तक कोई सर्वे नहीं कराया गया।
उत्तर प्रदेश के आगरा में नगर निगम के प्रकाश विभाग की लापरवाही से शहर की तमाम सड़कों पर अंधेरा है। करीब 15 हजार स्ट्रीट लाइटें खराब हैं। इनकी मरम्मत के लिए विभाग को शिकायतों का इंतजार है। कोई सर्वे नहीं कराया। सवाल खड़े हो रहे हैं कि रोशनी के लिए बल्ब और हैलोजन ही नहीं तो कैसे रास्तों से अंधेरा मिटेगा।
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शहर के 100 वार्डों में करीब 60 हजार स्ट्रीट लाइटें हैं। 2500 से अधिक खंभों पर तिरंगा लाइट लगी थीं। दो साल में तिरंगा लाइटें खराब हो गईं। करीब 15 हजार से अधिक स्ट्रीट लाइटें बंद हैं। प्रकाश व्यवस्था प्रभारी पंकज भूषण का कहना है कि खराब लाइटों का कोई सर्वे नहीं हुआ। रोज 30 से 35 शिकायतें आती हैं। जिन जगह से शिकायतें मिलती हैं वहां ठीक कराते हैं। रोज 30 से 35 लाइटें ठीक कराई जा रही हैं।
तीन दिन में मिल जाएगा सामान
उन्होंने बताया कि 200 एलईडी का ऑर्डर दिया है। दो से तीन दिन में सामान मिल जाएगा। चाणक्यपुरी निवासी मनोज कुमार का कहना है कि रास्तों में अंधेरा होने के कारण असामाजिक तत्वों का जमावड़ा रहता है। पुलिस गश्त नहीं करती। नगर निगम की लापरवाही से रात के अंधेरे में सड़क दुर्घटनाएं हो रही हैं।
कबाड़ की तरह पड़ा सामान
नगर निगम के स्टोर में प्रकाश व्यवस्था का सामान कबाड़ की तरह पड़ा है। यहां एक हजार से अधिक स्ट्रीट लाइट के खंभे जंग खा रहे हैं। स्ट्रीट लाइट के खोल व अन्य सामान बरसात में भी खुले पड़े रहते हैं। स्ट्रीट लाइटों पर हर साल करीब एक करोड़ का बजट है। जबकि तिरंगा लाइटों के नाम पर फर्जीवाड़े के आरोप हैं।