आईजी ने निर्देश दिए हैं एक कमेटी का गठन कर स्क्रीनिंग की जाए। इनके स्थान पर नई तैनाती की जाए। उन्होंने बताया कि इस संबंध में डीजी का आदेश भी है। सिपाही अधिकतम पांच वर्ष ट्रैफिक में रह सकता है। इसी तरह सभी की समय सीमा निर्धारित है।
मुकदमे के बाद भी हटाए गए नहीं
आईजी ने समीक्षा में पाया कि ट्रैफिक के तीन में से दो इंस्पेक्टर, 62 में से 20 हेड कांस्टेबल और 140 में से 13 कांस्टेबल ऐसे हैं जिनके खिलाफ शिकायतें हैं। कई पर केस भी दर्ज हैं। इन्हें हटाया नहीं जा रहा है। इनके अतिरिक्त कई ऐसे हैं जिनका जनता के साथ व्यवहार ठीक नहीं है या फिर उनकी छवि खराब है।
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