आगरा। हाथी घाट पर श्रद्धालु यमुना जल नहीं, मंटोला नाले के दूषित पानी से आचमन करने को मजबूर हैं। इससे श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत हो रही हैं। मंटोला नाले का पानी जो मोक्षधाम की तरफ बहता था, उसका बहाव यमुना में आई बाढ़ के बाद हाथी घाट की तरफ हो गया है।
शहर का सबसे बड़ा मंटोला नाला मोक्षधाम मोड़ स्थित चंद्रशेखर पार्क के बराबर से यमुना में गिरता था। इसका बहाव मोक्षधाम की तरफ था, लेकिन, सितंबर में यमुना में आई बाढ़ के कारण मंटोला सहित सभी नाले चोक हो गए। नदी का पानी उतरा, तो सिल्ट ने नाले का मुंह बंद कर दिया। नाले के पानी का बहाव अब उल्टी दिशा में हाथी घाट की ओर हो गई। हाथी घाट पर काली माता सहित कई मंदिर हैं। जहां हजारों श्रद्धालु रोज आते हैं। यमुना में पानी किनारों को छोड़ बीच में बह रहा है।
ऐसे में यमुना किनारे बह रहे नाले के दूषित पानी को ही श्रद्धालु यमुना जल समझ कर आचमन को मजबूर हैं। रिवर कनेक्ट कैंपेन के संयोजक ब्रज खंडेलवाल का कहना है कि यमुना नदी में नाले के गंदे पानी का गिरना पूरी तरह से बंद किया जाए।
पर्यावरणविद डॉ. देवाशीष भट्टाचार्य का कहना है कि एनजीटी ने नदी में नाला गिराने पर रोक लगा रखी है। नगर निगम की लापरवाही से मंटोला नाले के जरिए सीवर, चमड़े की कतरन व अन्य गंदगी पहले नदी में जा रही थी। अब धर्मस्थलों के आगे बह रही है। यमुना प्रेमी शारिक इकबाल ने भी इस दुर्दशा पर रोष व्यक्त किया है। मंडलायुक्त शैलेंद्र कुमार सिंह का कहना है कि इस संबंध में नगरायुक्त अंकित खंडेलवाल से रिपोर्ट मांगी जाएगी।