जनता की आवाज विधानसभा में उठाने का वादा कर लखनऊ पहुंचने वाले माननीय शहर की ‘पंचायत’ से गायब रहे। नगर निगम के इस बोर्ड के अब तक 30 अधिवेशन हो चुके हैं उनमें महज तीन अधिवेशनों में माननीयों ने शिरकत की है।
सांसद, विधायक और एमलएसी नगर निगम और जिला पंचायत के पदेन सदस्य होते हैं। नगर निगम की कार्यकारिणी, उप समितियों के चुनाव और बजट आदि की बैठक में सांसद, विधायकों को भी मौजूद रहना होता है। इसी वजह से नगर निगम सदन की बैठक उन तारीखों में नहीं होती है जब लोकसभा और विधानसभा का सत्र चलता है। मेयर इंद्रजीत आर्य की अध्यक्षता में अब तक नगर निगम सदन की 30 बैठक हो चुकी हैं लेकिन माननीय महज तीन बैठकों में मौजूद रहें हैं। सदन की पहली बैठक में सांसद और विधायकों की संख्या ठीक रही थी लेकिन शेष दो सदन में दो, तीन सदस्य ही पहुंचे थे। 14 वें सदन की बैठक में विधायक योगेंद्र उपाध्याय और जगन प्रसाद मौजूद रहे थे तो 21 वें सदन की बैठक में जगन प्रसाद गर्ग, धर्मपाल सिंह, वीरू सुमन और योगेंद्र उपाध्याय पहुंचे थे। नगर निगम सचिवालय के कर्मचारियों का कहना है कि हर बैठक की सूचना सांसद और विधायकों को समय पर पहुंच पाई जाती है। पिछला सदन 20 दिसंबर को समाप्त हुआ है।
पहले अधिवेशन में यह पहुंचे
नगर निगम का पहला अधिवेशन 09 जुलाई 2012 को हुआ था। पहले अधिवेशन में मेयर और पार्षदों को शपथ दिलाई गई थी। इस अधिवेशन में सांसद प्रोफेसर रामशंकर कठेरिया, विधायक धर्मपाल सिंह, जगन प्रसाद गर्ग, योगेंद्र उपाध्याय, रामसकल गुर्जर, वीरू सुमन, गुटियारी लाल दुबेश, धर्मप्रकाश भारती, प्रताप सिंह बघेल पहुंचे थे।