कासगंज। इस बार शुरूआती दौर में आम के बागों में अच्छा बौर खिलने के कारण बागबानों के मन में खुशियां छाई थीं कि इस बार उन्हें अच्छी फसल मिलेगी तो पिछले साल का नुकसान भी पूरा हो जाएगा और अच्छे दाम भी मिलेंगे। लेकिन मौसम और लॉकडाउन ने बागबानों की खुशियां उड़ा दीं। पेड़ों पर लगी आम की फसल 25 से 30 फीसदी तक गिर गई। गिरी हुई फसल की कीमत के आधे दाम भी नहीं मिलते हैं।
क्षेत्र में आम का उत्पादन बड़े स्तर पर होता है। इसे बाहर की मंडियों में बेचा जाता है। आम का चक्र भी कुछ ऐसा होता है कि एक साल आम काफी मात्रा में आता है, तो अगले साल यह कम आता है। पिछले साल आम की फसल बहुत ही कम हुई थी। इस बार शुरूआत में शानदार बौर आया था। इससे किसान खुश थे। लेकिन होली के आसपास हुई बरसात और औले ने आम को काफी नुकसान पहुंचाया।
वहीं मार्च के अंत और अप्रैल की शुरूआत में जब आम तैयार हो जाता है उसी समय आम के पक्के ऑर्डर मिलने लगते हैं। बड़े-बड़े व्यापारी पूरे-पूरे बाग की बुकिंग कर लेते हैं। आम पकने के बाद मंडियों में भेज दिया जाता है। लेकिन इस बार हालात ही बदल गए।
मार्च अप्रैल में लॉकडाउन के कारण जो आम बचा था उसके भी सही से ऑर्डर नहीं मिल पाए। इसके बाद रविवार शाम को आए आंधी तूफान ने इस फसल को और भी चौपट कर दिया। इससे आम के बागबानों को काफी नुकसान हुआ है।
फैक्ट फाइल-
- यहां के बागों में दशहरी, चौसा, टिकारी, काला बंबई, बंबई, देशी, लंगड़ा, फजली अन्य प्रजातियों के आम की होती है पैदावार।
- जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, भीलवाड़ा, दिल्ली, मुंबई, भोपाल, इंदौर, ग्वालियर सहित तमाम अन्य महानगरों तक जाता है यहां का आम।
- ढोलना, सहावर, बिलराम, पटियाली, दरियावगंज, बढ़ारी, सिढ़पुरा, मोहनपुरा, पिवारी सहित अन्य इलाकों में हैं आमों के बाग।
आंकड़े
- 1340 हेक्टेयर में जिले में हैं आम के बाग।
- 10 से 11 टन आम का अच्छी फसल पर होता है उत्पादन।
- 6 से 7 टन का होता है सामान्य फसल के दौरान उत्पादन।