सोरों(कासगंज)। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चित्रकूट में तीन दिन पूर्व राजापुर को तुलसीदास का जन्मस्थल बताते हुए विकास की घोषणाएं कीं। सीएम की इस घोषणा पर सोरों सूकरक्षेत्र के वाशिंदों और विभिन्न संगठनों ने कड़ा ऐतराज जताया है। लोग सोशल मीडिया के माध्यम से भी विरोध दर्ज कर रहे हैं। अखंड आर्यावर्त निर्माण संघ ने साफ कहा है कि यदि राजापुर का तुलसी जन्मस्थली के रूप में विकास किया गया तो सोरों के वाशिंदे बड़ा आंदोलन करने को विवश होंगे।
राजापुर को तुलसी का जन्मस्थान बताकर विकास की घोषणा से वाशिंदे आहत हैं।
अखंड आर्यावर्त निर्माण संघ के अध्यक्ष भूपेश शर्मा ने बताया कि राजापुर को तुलसी का जन्म स्थान बताना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी शासनकाल के गजेटियर मेें भी साफ लिखा है कि तुलसीदास का जन्मस्थान सोरों सूकरक्षेत्र है। मुख्यमंत्री को इस तरह की घोषणा नहीं करनी चाहिए। क्योंकि इसे तय करने का निर्णय विद्वान, इतिहासकार और साहित्यकार ले सकते हैं न कि सरकार इसका निर्णय ले सकती है। उन्होंने सोशल मीडिया पर सीएम की घोषणा पर ऐतराज किया है। वहीं उन्हें ज्ञापन भेजा गया है। उन्होंने कहा कि सरकार यदि इस घोषणा को वापस नहीं लेती है तो अखंड आर्यावर्त निर्माण संघ बड़ा आंदोलन करेगा।
विहिप ने भी सीएम को भेजा ज्ञापन, जताई आपत्ति
सोरों। सीएम द्वारा तुलसीदास के जन्मस्थान को राजापुर बताने पर विश्व हिंदू परिषद ने भी आपत्ति जताई है। विहिप ने एक ज्ञापन मुख्यमंत्री को भेजा है। विहिप के नगर संयोजक सुनील तिवारी ने कहा कि रामचरित मानस में संत तुलसीदास ने स्वयं ही लिखा है कि मैं पुनि निज गुरू सन सुनी कथा सो सूकरखेत। इससे स्पष्ट है कि सोरों सूकरक्षेत्र में तुलसी का जन्म हुआ। तुलसीमानस पत्रिका के संपादक डॉ. प्रभाकर पाराशरी ने भी मुख्यमंत्री के निर्णय को गलत बताया है। वहीं वराह मंदिर के महंत विदेहानंद गिरी ने कहा कि यह अच्छी बात है कि मुख्यमंत्री ने राजापुर में विकास कराने की घोषणा की है, लेकिन राजापुर को तुलसी का जन्मस्थान बताना गलत है। विश्व हिंदू परिषद के शिव वैंदेल, नरेश त्रिगुणायत, अमरदीप मिश्र आदि ने मुख्यमंत्री की घोषणा पर आपत्ति जताई है।