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Firozabad: एक करोड़ से अधिक की नकदी लेकर बीसी संचालक फरार, पीड़ितों ने दर्ज कराया मुकदमा

Wed, 19 Oct 2022 12:11 AM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद

सार

फिरोजाबाद में बीसी (कमेटी) का धंधा गली मोहल्लों में संचालित हो रहा है। अभी तक कई लोग धोखाधड़ी का शिकार हो चुके हैं।दक्षिण थाना क्षेत्र के मोहल्ला हिमायूंपुर निवासी व्यक्ति भी बीसी संचालक है। वह एक करोड़ से अधिक की धनराशि लेकर भाग गया है। 
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Istock
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विस्तार
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फिरोजाबाद में बीसी संचालक करीब एक करोड़ से अधिक की धनराशि लेकर फरार हो गया। इसकी जानकारी बीसी डालने वाले लोगों को हुई तो उन्होंने संचालक समेत छह सहयोगियों के खिलाफ थाना दक्षिण में तहरीर दी। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया है। आरोपी बीसी संचालक का पता लगाने का प्रयास कर रही है।

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दक्षिण थाना क्षेत्र के मोहल्ला हिमायूंपुर धनश्याम वाली गली निवासी सुरेश राठौर का कहना है कि मोहल्ले में रहने वाले संतराम के यहां बीसी डलती थी। करीब 50 लोग हर माह बीसी के रुपये देते थे, जो एक करोड़ से अधिक है। कुछ दिन पहले संतराम अपनी संपत्ति को गोपनीय तरीके से बेचकर भाग गया। 

परिवार सहित आरोपी हुआ फरार 

इसकी जानकारी जब उसके यहां बीसी डालने वाले लोगों को हुई तो उन्होंने उसकी तलाश की। लेकिन उसका व उसके परिवार का कोई पता नहीं लग सका। फरार हुए बीसी संचालक का पता न लगने पर सुरेश राठौर ने आरोपी के खिलाफ दक्षिण थाना पुलिस को तहरीर देकर पूरे मामले से अवगत कराया है। 

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पीड़ित की तहरीर पर दक्षिण थाना पुलिस ने बीसी संचालक संतराम, डोली, राम कुमार, मस्तराम, राजवीर राठौर, मान सिंह को नामजद करते हुए धोखाधड़ी के साथ अन्य धाराओं में मुकदमा पंजीकृत किया है। थानाध्यक्ष दक्षिण बैजनाथ सिंह का कहना है कि पीड़ित पक्ष की तहरीर पर आरोपी और उसके समर्थकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। मामले की जांच की जा रही है। 

क्या होती है बीसी 

सुहागनगरी में बीसी (कमेटी) डालने का काम पिछले काफी दिनों से संचालित है। कहीं 15 तो कहीं 20 लोग 30 माह तक कमेटी में पैसा एकत्रित करते है। इसमें तीस लोग जोड़कर हर माह एक व्यक्ति को जमा धनराशि में एक निश्चित ब्याज को काटकर दिए जाने का प्रावधान है। बीसी में शामिल 30 लोगों में जो संचालक होता है उसके पास सभी का पैसा जमा होता है। 

एक साथ कई-कई बीसी (कमेटी) संचालित करने वाले लोग लाखों रुपया एकत्रित करने के बाद गायब हो जाते हैं। इसके बाद उन लोगों का पैसा फंस जाता है तो हर माह किश्त अदा करते हैं। इस तरह से गायब होने के मामले शहर में एक दो नहीं बल्कि कई है। खुद के अपहरण का नाटक रचने वाले संजीव गुप्ता के पास बीसी का करोड़ों का कारोबार था। उसके पास जमा लोगों का पैसा आज तक नहीं मिला। 
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