कासगंज। मकर संक्रांति पर्व पर इस बार कई शुभ योग बन रहे हैं। शिववास योग का संयोग बन रहा है। इसके साथ ही पुनर्वसु व पुष्य नक्षत्र भी इस दिन रहेगा। इन संयोगों को ज्योतिष काफी शुभ मान रहे हैं। ज्योतिषियों का मानना है कि इन योगों में पूजा करने से भोलनाथ, माता पार्वती, सूर्य देव व शनिदेव की कृपा मिलेगी।ज्योतिषाचार्य पंडित मुकुंद बल्लभ भट्ट का कहना है कि मकर संक्रांति को सूर्यदेव की उपासना और शनिदोष से मुक्ति के लिए सबसे उपयुक्त दिन माना गया है। इस दिन भगवान शिव कैलाश पर्वत पर मां पार्वती के साथ विराजमान रहेंगे। इससे शिववास योग बन रहा है। इस दिन किसी समय भगवान शिव का अभिषेक एवं पूजा कर सकते हैं। पूजा करने से माता पार्वती व भोलेनाथ की कृपा प्राप्त होगी। मकर संक्रांति पर सबसे पहले पुनर्वसु नक्षत्र का संयोग है। इस योग का समापन सुबह 10 बजकर 17 मिनट पर होगा। इसके बाद पुष्य नक्षत्र का संयोग है। ज्योतिषियों की मानें तो वर्षों बाद मकर संक्रांति पर पुष्य नक्षत्र का संयोग है। इस नक्षत्र के स्वामी शनिदेव हैं। अत: पुष्य नक्षत्र में काले तिल का दान करने से साधक को शनि की बाधा से मुक्ति मिलेगी। इस शुभ अवसर पर बालव और कौलव करण के संयोग है। मकर संक्रांति का पुण्यकाल सुबह 9 बजकर 3 मिनट से शाम 5 बजकर 46 मिनट तक और महापुण्य काल सुबह 9 बजकर 3 मिनट से 10 बजकर 48 मिनट तक रहेगा।