धर्मांतरण गिरोह ने अपना जाल उत्तर प्रदेश, दिल्ली ही नहीं बल्कि आधा दर्जन से अधिक राज्यों में फैला रखा था। युवतियों को जाल में फंसाने के लिए युवतियों को ही जिम्मेदारी दी जाती थी। गिरोह के कनेक्शन पाकिस्तान में बैठे सदस्यों से लेकर कनाडा में रह रहे फंडिंग करने वाले भारतीय अब्दुल साउद से भी सामने आए थे।
सदर की सगी बहनों को कश्मीर की छात्राओं ने जाल में फंसाया था। उन्हें कश्मीर लेकर गई थीं। ब्रेनवाश करने के बाद दिल्ली बुलाया गया, वहां से उन्हें कोलकाता भेज दिया गया था। पुलिस ने देशभर में फैले धर्मांतरण गिरोह से कनेक्शन का पता चलने पर टीमों का गठन किया था। 14 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और राजस्थान की युवतियों को भी धर्मांतरण के लिए जाल में फंसाया था।
आरोपी अपने धर्म के बारे में बताते थे। दूसरे के धर्म में खामियां गिनाकर धर्मांतरण के लिए तैयार करते थे। कोलकाता के मुस्लिम बाहुल्य इलाके में ले जाकर धर्मांतरण कराते थे। निकाह कराने के बाद युवतियों का वापस अपने धर्म में लाैट पाना मुश्किल हो जाता था। गिरोह के कई सदस्य पाकिस्तान से सोशल मीडिया के माध्यम से गिरोह के सदस्यों को जिम्मेदारी देते थे। पिछले दिनों पुलिस ने भोपाल, मध्य प्रदेश के रहने वाले अब्दुल साउद की संपत्ति को कुर्क किया था। वह गिरोह के लिए फंडिंग करता था। वर्तमान में उसके कनाडा में रहने की आशंका है। पुलिस उसे भारत लाने के लिए प्रयास में लगी है।
मानव अंग बेचने के भी मिले थे सुबूत
पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों को कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेजा था। अब तक विवेचना चल रही है। आरोपी जेल में बंद हैं। उनसे बरामद मोबाइल, लैपटॉप, सोशल मीडिया एकाउंट व अन्य डाटा खंगाले गए। जांच में पता चला कि गिरोह के सदस्य जाल में फंसे लोगों के अंग भी बेचने का काम करते हैं। हालांकि अंग बेचने वाले अब तक नहीं पकड़े जा सके हैं।
नौवीं पास तलमीज रखता था विदेशियों से संपर्क
धर्मांतरण गैंग का तलमीज उर रहमान दिल्ली में रहकर जूते का कारोबार करता था। उसके संपर्क कनाडा में छिपे साउद से थे। साउद पर शिकंजा कसने के बाद उसके पाकिस्तान और अन्य देशों के गैंग के अन्य सदस्यों और अन्य राज्यों में काम कर रहे साथियों से तलमीज ही संपर्क रखता था। धर्मांतरण के लिए गैंग के सदस्यों तक विदेशी फंडिंग से मिला रुपया पहुंचाने का काम भी वही करता था। साउद के संपर्क में आने के बाद नौवीं पास तलमीज गैंग का मुख्य सदस्य बन गया था। वही तय करता था कि किस सदस्य को कितना रुपया भेजा जाएगा।