मैनपुरी के भोगांव स्थित नवोदय विद्यालय में हुई छात्रा की मौत के मामले में अधूरी जांच एसपी अजय शंकर राय के लिए मुसीबत बन गई। एसटीएफ जांच और सीबीआई जांच की सिफारिश के बीच थाना पुलिस ने विवेचना सुस्त कर दी। थाना पुलिस ढाई महीने में विवेचना नहीं कर सकी।
नवोदय विद्यालय में छात्रा की मौत के बाद पुलिस और जिला प्रशासन ने मौत का कारण आत्महत्या माना था। जबकि माता-पिता सहित अन्य परिजन हत्या का आरोप लगाते रहे। दुष्कर्म की भी संभावना जताई। पिता ने भोगांव थाने में रिपोर्ट भी दर्ज कराई, लेकिन पुलिस की ओर से आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं की गई।
परिजनों का पुलिस से उठता गया भरोसा
इसीलिए परिजनों का पुलिस और प्रशासन पर भरोसा उठता गया। शासन ने एसटीएफ को जांच सौंपी और सीबीआई जांच की सिफारिश की। इस बीच विवेचना कर रही थाना पुलिस की रफ्तार सुस्त हो गई। पुलिस की यही सुस्ती एसपी अजय शंकर राय के लिए भारी पड़ गई।
विवेचना में लेटलतीफी पर शासन ने रविवार को मैनपुरी के पुलिस अधीक्षक अजय शंकर राय को तत्काल प्रभाव से हटाकर पुलिस महानिदेशक मुख्यालय, लखनऊ से संबद्ध कर दिया था। वहीं उनके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई के निर्देश भी दिए।
अगर पुलिस ने अपनी विवेचना पूरी की होती और परिजनों को विश्वास में लिया होता तो शायद यह नौबत नहीं आती। अजय शंकर राय की जगह शामली के पुलिस अधीक्षक अजय कुमार को मैनपुरी में तैनाती दी गई है।
हैदराबाद कांड बना प्रमुख वजह
कांग्रेस, सपा सहित विभिन्न संगठन शुरू से ही इस मामले में सरकार को घेरने में लगे रहे थे। घटना के वक्त कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी ने ट्वीट और सपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ट्वीट भी किया।
प्रियंका गांधी के कहने पर पूर्व कैबिनेट मंत्री जितिन प्रसाद ने छात्रा के परिजनों से मुलाकात की। एक ओर राजनीतिक दल सरकार को घेरने के मौके तलाश रहे थे। वहीं पुलिस की विवेचना में सुस्ती बढ़ती जा रही थी।
इसी बीच हैदराबाद कांड के बाद मैनपुरी की छात्रा को इंसाफ दिलाने के लिए कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष की ओर से मुख्यमंत्री को पत्र लिखा गया। सरकार ने भी विरोधी दलों को राजनीति करने का मौका नहीं दिया और एसपी पर कार्रवाई कर दी।
मजिस्ट्रेटी जांच का भी पता नहीं
छात्रा की मौत के मामले में जिलाधिकारी पीके उपाध्याय की ओर से मजिस्ट्रेटी जांच के निर्देश दिए गए थे। उन्होंने एक सप्ताह में रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश जांच अधिकारी को दिए थे। छात्रा के परिजनों का आरोप है कि आज तक मजिस्ट्रेटी जांच पूरी नहीं हुई। कार्रवाई से उन्हें अवगत भी नहीं कराया गया।