मैनपुरी। सीएम विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के तहत खुद को कुशल दर्जी बताकर सिलाई मशीन पाने के लिए आवेदन करनी वाली 83 फीसदी महिला उम्मीदवार बृहस्पतिवार को हुए साक्षात्कार में फेल हो गईं। इनको एक मीटर में कितने सेंटीमीटर कपड़ा होता है और सिलाई मशीन में किस नंबर की सुई का क्या प्रयोग होता है। इसका भी ज्ञान नहीं था। 234 उम्मीदवार इस साक्षात्कार में शामिल हुए। सिर्फ 41 महिलाएं ही चयनित हुईं।
जिला उद्योग केंद्र कार्यालय में आयोजित इन साक्षात्कार जीएम डीआईसी उत्कर्ष चंद्र, आईटीआई मैनपुरी के अनुदेशक रमेश चंद्र, जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी राजेश कुमार के तीन सदस्यीय पैनल ने किए। स्वयं को कुशल दर्जी बताने वाली 83 प्रतिशत महिलाएं और युवतियां सिलाई से जुड़े बुनियादी सवालों का जवाब देने में असमर्थ रहीं। उनसे जब पूछा गया कि एक मीटर में कितने सेंटीमीटर कपड़ा होता है, तो वे इसका सीधा उत्तर नहीं दे पाईं। इतना ही नहीं सिलाई मशीन में उपयोग होने वाली विभिन्न प्रकार की सुइयों (नंबर के आधार पर) और उनके विशिष्ट कार्यों के बारे में भी उनका ज्ञान नहीं था।
स्नातक की डिग्री हाथ में और नहीं पता कौन-कौन से विषय पढ़े
साक्षात्कार में कई स्नातक पास युवतियां भी शामिल हुईं। पैनल ने युवतियों से सवाल किया कि उनके पास कौन-कौन से विषय थे। उक्त विषयों पर आधारित सवाल किए गए। मगर, युवतियां इन सवालों के भी सही जवाब नहीं दे पाईं। इस स्थिति न केवल उनके शैक्षणिक ज्ञान पर, बल्कि उनकी डिग्री पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया। कुछ आवेदक तो ऐसे भी थे जो जिस योजना के तहत आवेदन कर रहे थे, उसका नाम तक नहीं बता सके।
सिलाई मशीन के लिए सिर्फ महिला आवेदक, पुरुष नदारद
सीएम विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के तहत दर्जी के रूप में सिलाई मशीन प्राप्त करने के लिए हुए साक्षात्कारों में एक दिलचस्प तथ्य यह भी सामने आया कि योजना के तहत कुल 234 महिला आवेदक साक्षात्कार देने पहुंचीं, जबकि एक भी पुरुष आवेदक उपस्थित नहीं हुआ। विभाग का मानना है कि पुरुषों की अनुपस्थिति के कई कारण हो सकते हैं, जिनमें शायद अन्य व्यवसायों में अधिक रुचि, सिलाई को अब मुख्य रूप से महिलाओं का कार्य मानना शामिल है। वहीं, महिलाओं की भारी भागीदारी यह दर्शाती है कि वे आत्मनिर्भर बनने और सरकार द्वारा प्रदान किए जा रहे अवसरों का लाभ उठाने के लिए उत्सुक हैं।
सरकार का उद्देश्य पात्र और इच्छुक व्यक्तियों को सशक्त बनाना है। वास्तविक कारीगरों और योग्य व्यक्तियों को ही इस योजना का लाभ मिलेगा। 234 में से सिर्फ 41 आवेदिकाएं ही पास हो सकी हैं।
- उत्कर्ष चंद्र, जीएस डीआईसी