मैनपुरी। जिले के सहायता प्राप्त कॉलेजों का भी बुरा हाल है। प्रबंधकों की शिथिलता और विवाद के कारण सहायता प्राप्त कॉलेज की जर्जर स्थिति ठीक नहीं हो पा रही है। देख-रेख के अभाव में 53 एडेड कॉलेजों में से 43 के भवन जर्जर हो चुके हैं। यहां छात्र-छात्राओं की संख्या भी तेजी के साथ घटती जा रही है।
जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में दर्ज रिकॉर्ड के अनुसार जिले में 53 सहायता प्राप्त कॉलेज संचालित हो रहे हैं। दो दशक पहले तक सहायता प्राप्त कॉलेज न केवल निजी स्कूलों बल्कि सरकारी स्कूलों को भी पीछे छोड़कर नंबर एक पर चल रहे थे। सरकार ने सहायता प्राप्त कॉलेजों में प्रबंधकों के अधिकार कम किए तो प्रबंधक भी शिथिल होने लगे और उन्होंने विद्यालय के भौतिक रूप को संवारने से अपना ध्यान हटा लिया। इसका परिणाम यह हुआ कि जिले के 43 सहायता प्राप्त कॉलेज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहे हैं। सहायता प्राप्त कॉलेजों में जहां 15 से 20 कक्ष हुआ करते थे वहां अब बच्चों के बैठने योग्य मात्र तीन से चार कक्ष ही बचे हैं।
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बड़ी संख्या में कम हो रही है छात्र संख्या
सहायता प्राप्त कॉलेजों की बात करें तो दो दशक पहले प्रत्येक सहायता प्राप्त कॉलेज में 1000 से तीन हजार तक छात्र पंजीकरण था वहां अब यह संख्या घटकर 500 से भी नीचे आ गई है। कई कॉलेज ऐसे हैं जहां 100 से 200 ही छात्र बचे हैं। यदि समय से ध्यान नहीं दिया गया तो यह स्कूल बंदी की कगार पर पहुंच जाएंगे।
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मात्र दो कॉलेजों ने लिया प्रोजेक्ट अलंकार योजना का लाभ
सरकार ने सहायता प्राप्त कॉलेजों के लिए प्रोजेक्ट अलंकार योजना शुरू की है। इस योजना के तहत विद्यालय में किसी भी प्रकार के निर्माण के लिए 25 प्रतिशत धनराशि प्रबंध समिति को देनी होगी 75 प्रतिशत धनराशि सरकार देगी। पिछले तीन साल में यहां मात्र दो कॉलेजों ने ही प्रोजेक्ट अलंकार योजना का लाभ लिया है। नेशनल इंटर कॉलेज भोगांव और नेहरू स्मारक इंटर कॉलेज समान में प्रोजेक्ट अलंकार योजना से काम कराया जा रहा है।
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सरस्वती इंटर कॉलेज अजीतगंज में सात कक्षाओं के लिए मात्र 4 कमरे
मैनपुरी। कभी शिक्षा के क्षेत्र में जनपद में अपनी पहचान बनाने वाले सरस्वती इंटर कॉलेज अजीतगंज का अस्तित्व खतरे में है। इस कॉलेज की स्थापना वर्ष 1951 में ग्रामीण चंद्रप्रकाश मिश्रा और बालाप्रसाद ने ग्रामीणों के सहयोग से की थी। यहां दो दशक पहले दो हजार से अधिक छात्र-छात्राएं पढ़ते थे। विद्यालय के 11 कमरों में से सात पूरी तरह से ध्वस्त हो चुके हैं। बच्चों के बैठने के लिए मात्र चार कमरे ही सुरक्षित बचे हैं। छात्र-छात्राओं के बैठने के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। इसके चलते यहां छात्र संख्या काफी कम हो गई है। वर्तमान में यहां मात्र 200 छात्र-छात्राओं का ही पंजीकरण है। 12 अध्यापक कार्यरत हैं। कक्षा छह से आठ की क्लास एक ही कक्ष में लगती है। 11 और 12 की कक्षा एक साथ लगती है। कक्षा 9 और 10 के लड़के एक साथ बैठते है। जबकि लड़कियां दूसरी मंजिल पर पड़े टिनशेड में बैठने को मजबूर हैं। पढ़ाई तो अच्छी हो रही है लेकिन विद्यालय भवन की स्थिति खराब होने के कारण छात्र-छात्राएं यहां पढ़ने को राजी नहीं हैं। यहां कार्यरत प्रधानाचार्य शैलेंद्र गौर ने बताया कि विद्यालय भवन के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। यहां पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को बेहतर शिक्षा का प्रयास किया जा रहा है।
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कॉलेज में पढ़ाई अच्छी होती है लेकिन भवन अच्छा नहीं होने के कारण यहां छात्र-छात्राएं पढ़ना नहीं चाहते हैं। मात्र चार कमरे होने के कारण कभी-कभी बाहर कक्षा संचालन होता है।
- खुशबू कक्षा 10
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कॉलेज में मात्र चार कमरे ही शेष बचे हैं। इनमें से दो की हालत अच्छी नहीं है बरसात में कभी-कभी इनसे भी पानी टपकता है। यहां भवन की जरूरत है पढ़ाई में कोई कमी नहीं है।
- ओम मिश्रा कक्षा आठ
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एक समय था कि कॉलेज का जिले के गिने चुने स्कूलो में नाम था। प्रबंधतंत्र ने इस ओर ध्यान नहीं दिया इसके चलते विद्यालय की स्थिति खराब हो रही है।
- रामाधार सिंह, अभिभावक
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सरकार जब यहां तैनात शिक्षकों को सरकारी वेतन दे रही है तो भवन निर्माण भी करा सकती है। सरकार को काॅलेज के भवन निर्माण के लिए ध्यान देना चाहिए।
- सुभाष चंद्र, अभिभावक
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सहायता प्राप्त कॉलेजों के जीर्णोद्धार के लिए सरकार की ओर से प्रोजेक्ट अलंकार योजना शुरू की गई है। प्रबंधक और प्रधानाचार्य इस योजना के तहत प्रस्ताव उपलब्ध कराएं शासन की ओर से उन्हें हर संभव मदद दिलाई जाएगी।
- सतीश कुमार, जिला विद्यालय निरीक्षक