मैनपुरी। गेहूं की कटाई और मढ़ाई के बीच जिले में दमा के मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। जिला अस्पताल में प्रतिदिन 80 से 90 मरीज दमा की दिक्कत से पीड़ित होकर पहुंच रहे हैं। उपचार में देरी के कारण मरीजों की जान पर भी आफत आ रही है।
जिले में गेहूं की कटाई और मढ़ाई का काम जोरों पर चल रहा है। भूसे में मिट्टी के साथ अन्य कई प्रकार के पौधों के कण भी मिले होते हैं, जिसकी वजह से वह कण व्यक्ति के फेफड़ों तक पहुंच रहे हैं। इस कारण खांसी के साथ ही एलर्जी से लोग बेहाल हो रहे हैं। मौजूदा समय में जिला अस्पताल की ओपीडी में रोजाना करीब 80 से 90 मरीज दमा और खांसी का उपचार कराने आ रहे हैं। जिला अस्पताल में दर्ज रिकार्ड के अनुसार पिछले एक सप्ताह में दमा से पीड़ित सात मरीजों की मौत हो चुकी है, जबकि 35 मरीज गंभीर हालत में रेफर किए गए हैं। यहीं नहीं 150 से अधिक मरीज भर्ती कराए जा चुके हैं।
ऑक्सीजन लेवल भी हो रहा है कम
तेज धूप में देर तक काम करने से लोगों का ऑक्सीजन लेवल भी कम हो रहा है। जिला अस्पताल की इमरजेंसी में प्रतिदिन अस्थमा के ऐसे मरीज जिनका ऑक्सीजन लेवल कम हो रहा है भर्ती कराए जा रहे हैं। जिला अस्पताल में अन्य दिनों में ऑक्सीजन की जरूरत एक से दो सिलिंडर ही होती थी, लेकिन मरीज बढ़ने के कारण अब प्रतिदिन तीन से चार ऑक्सीजन के जंबो सिलिंडर उपयोग में लिए जा रहे हैं।
इन बातों को रखें ख्याल
- गेहूं की कटाई के समय मास्क या गमछे का प्रयोग करें
- धूप में अधिक देर तक कटाई न करें
- गेहूं की मड़ाई के समय भूसे की धुंध से बचाव करें
- कमरे या कूप में भूसा डालते समय अधिक देर तक न रुकें
- जरा भी दिक्कत होने पर विशेषज्ञ डॉक्टर से उपचार लें
दमा के लक्षण
- बार-बार खांसी आना
- सांस लेते समय सीटी जैसी आवाज आना
- छाती में जकड़न और भारीपन होना
- बेचैनी होना
- खांसी के साथ बलगम आना
खान-पान पर रखें ध्यान
जिला अस्पताल के चेस्ट फिजीशियन डॉ. धर्मेंद्र कुमार बताते हैं कि दमा के मरीज अपने खान-पान पर विशेष ध्यान दें। दमा के मरीजों को गेहूं, पुराना चावल, मूंग, कुल्थी, दाल, आदि का सेवन करना चाहिए। इसके अलावा उन्हें अपने आहार में हरी पत्तेदार सब्जियों को शामिल करना चाहिए। इसके अलावा पालक और गाजर के रस को दमा में काफी फायदेमंद माना जाता है। मरीजों को अपने आहार में लहसुन, अदरक, हल्दी और काली मिर्च को भी जरूर शामिल करना चाहिए।