मैनपुरी में लगातार दूसरे दिन शुक्रवार को डीपआरओ अविनाश चंद का एक और ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इसमें डीपीआरओ कह रहे हैं कि डीएम साहब बैठक में भाषण दे रहे थे कि कोई एक पैसा मांगे तो उन्हें बताना। बाद में रात को बुलाकर कानून अलग से पेल रहे थे। लगाातर दो ऑडियो वायरल होने के बाद हर कोई यही चर्चा कर रहा है।
जिला पंचायत राज अधिकारी अविनाश चंद लगातार फंसते जा रहे हैं। बृहस्पतिवार को डीएम को 25 हजार और सीडीओ को 25 हजार देने का ऑडियो शिकायत के बाद सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। वहीं शुक्रवार को सोशल मीडिया पर सुबह से ही एक दूसरा ऑडियो भी चलने लगा। इसमें डीपीआरओ अविनाश चंद डीएम अविनाश कृष्ण के लिए गरिमा के विपरीत शब्दों का प्रयोग कर रहे हैं।
वह फोन पर बात करते समय कह रहे हैं कि ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन के लिए ग्राम पंचायत श्यामपुर भटपुरा के लिए आई 7.92 लाख की धनराशि उन्होंने खाते में भेज दी है। वे कह रहे हैं कि ग्राम पंचायतों के सचिवों के साथ आयोजित बैठक में डीएम साहब भाषण दे रहे थे, कि कोई एक पैसा मांगे तो बताना। लेकिन रात में दस बजे घर बुलाकर कानून पेल रहे थे। किसी तरह मैनें रुपये देकर फाइल पर हस्ताक्षर कराए। इसलिए तुम दस हजार रुपये का इंतजाम कर देना। ऑडियो में बात कर रहा दूसरा व्यक्ति भी दस हजार रुपये की व्यवस्था करने का आश्वासन दे रहा है। डीएम के लिए ऐसे शब्द सुनकर हर कोई हैरान है। अधिकारी भी मामले में कुछ भी कहने से बच रहे हैं। पूरे प्रशासन में डीपीआरओ के ऑडियो के चलते खलबली मच गई है।
अभद्र भाषा का ऑडियो में हो रहा प्रयोग
किसी भी जिले का डीएम अधीनस्थ अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए सम्माननीय होता है। लेकिन डीपीआरओ ने न तो डीएम के पद की गरिमा का मान रखा और न ही अपनी जिम्मेदारी का। ऑडियो में अभद्र भाषा का प्रयोग करते ही चले गए। उन्हें ये भी याद नहीं रहा कि अगर डीएम तक ये बातें पहुंचीं तो उनके विरुद्ध क्या कार्रवाई हो सकती है।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे मैसेज
शुक्रवार को वायरल हुए ऑडियो के साथ एक बड़ा मैसेज भी सोशल मीडिया पर चल रहा है। इसमें लिखा है कि जिले स्तर से लेकर शासन तक डीपीआरओ के कारनामे अधिकारियों के संज्ञान में हैं, लेकिन फिर भी उन्हें बचाने का प्रयास किया जा रहा है।
खाली पड़ रही डीपीआरओ की कुर्सी
बृहस्पतिवार को ऑडियो वायरल होने के बाद पंचायत राज विभाग में भी माहौल गर्म है। शुक्रवार को पूरे दिन डीपीआरओ अविनाश चंद अपने कार्यालय नहीं पहुंचे। उनकी कुर्सी खाली ही नजर आई। हालांकि दोपहर 12 बजे कलेक्ट्रेट में आयोजित समीक्षा बैठक में वे शामिल होने पहुंचे थे। इसके बाद वे कहां गए, किसी को नहीं पता। फोन पर भी उनसे संपर्क नहीं हो सका।