आगरा किले के जहांगीरी महल में 265 साल बाद महाराजा सूरजमल विजय दिवस मनाया गया, जिसमें उनके शौर्य और पराक्रम को याद किया गया। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों और समाज के लोगों ने महाराजा सूरजमल के योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का संकल्प दोहराया।
आगरा किला भरतपुर नरेश महाराजा सूरजमल ने 12 जून, 1761 को जीता था। 265 साल बाद प्रदेश सरकार ने किले के जहांगीरी महल में विजय दिवस मनाया। वक्ताओं और मौजूद लोगों ने महाराजा सूरजमल के शौर्य और पराक्रम को याद किया। साथ ही युग-युग तक अमर रहने के उद्घोष भी किए।
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आगरा किले के ऐतिहासिक जहांगीरी महल में हुए कार्यक्रम का शुभारंभ महाराजा सूरजमल के चित्र पर विधायक जीएस धर्मेश और महाराजा सूरजमल के वंशज नेम सिंह फौजदार ने माल्यार्पण और दीप जलाकर किया। डॉ. धर्मेश ने कहा कि हमारे महान नायकों के शौर्य, पराक्रम और उनके बलिदान की गाथाएं युवाओं तक पहुंचे, जिससे वे अपनी गौरवशाली जड़ों और इतिहास पर गर्व कर सकें।
जहांगीर महल में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने रागिनियों के जरिये महाराजा सूरजमल की वीरता बयां की। केंद्रीय राज्य मंत्री एसपी सिंह बघेल ने शूरवीर सूरजमल के आदर्शों को याद किया। उन्होंने कहा कि मुगलों के खिलाफ उनका पराक्रम, राष्ट्रसेवा और समाज हित के लिए दिया गया उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करता रहेगा।
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उन्होंने कहा कि भरतपुर रियासत के नरेश ने आगरा के किले को जीता। उनके वंशजों को यह याद रखना चाहिए कि उनकी नगरी फतेहपुर सीकरी, मांट, खैर आदि जाट बहुल वाले क्षेत्र क्यों छिन गए। अब बैलेट से राजा पैदा होता है, जन्म से नहीं। समाज के लोग इस पर विचार करें। कार्यक्रम खत्म होने के बाद आयोजक ने सभी लोगों को रोका तो केंद्रीय मंत्री ने चुटकी लेते हुए कहा कि जब भरतपुर लुट गया तब उन्हें बुलाया गया है।
ये रहे शामिल
विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल, भाजपा महानगर अध्यक्ष राजकुमार गुप्ता, पूर्व मंत्री उदयभान सिंह, पुरुषोत्तम फौजदार, मोहन सिंह सोलंकी और कुंवर शैलराज सिंह आदि मौजूद रहे।