कासगंज। तीर्थनगरी सोरों में सात फरवरी से कांवड़ मेला शुरू हो गया है जो 22 फरवरी तक चलेगा। तमाम शिव भक्त यहां पहुंच रहे हैं। गंगा की धारा से कांवड़ में गंगाजल ले जा रहे हैं। महाशिवरात्रि पर भोलेनाथ का अभिषेक कर पूजा-अर्चना करेंगे। लेकिन हर बार की तरह इस बार भी यहां अव्यवस्था नजर आ रही है। प्रशासन ने लहरा गंगा की तलहटी की धार की ओर जाने वाले रास्ते को ठीक नहीं कराया है। यहां उड़ने वाली धूल से कांवड़िये परेशान हैं।
महाशिवरात्रि के इस कांवड़ मेले में तीन लाख से ज्यादा भक्त राजस्थान, मध्यप्रदेश सहित अन्य प्रदेशों से कांवड़ लेकर पहुंचते हैं। लहरा गंगा की धार से कांवड़ भरने की प्राचीन परंपरा है। कांवड़ियों को लहरा से गंगा की धारा तक तलहटी के उबड़-खाबड़ रास्ते को पार करना होता है। बालू के ऊंचे-नीचे टीले हैं। दिन में तो किसी तरह कांवड़िये तलहटी के रास्तों से गुजर जाते हैं, लेकिन रात के समय अंधेरे में काफी दिक्कतें होती हैं। केवल टॉर्च की रोशनी ही उनके हाथों में होती है। पिछले कई वर्षों से लगातार तलहटी के मार्ग को मेले के लिए सुगम बनाने की मांग उठ रही है, लेकिन इस पर प्रशासन का ध्यान नहीं है। तमाम कांवड़िये दुर्घटना के शिकार हो जाते हैं।
बोले- भक्तों के लिए हो सुगम रास्ता
वर्जन-
- तीर्थनगरी का कांवड़ मेला पौराणिक और ऐतिहासिक है। लाखों भक्त कांवड़ उठाने आते हैं। मेला के लिए सुगम रास्ता के अलावा कई सुविधाएं होनी चाहिए। जिससे श्रद्धालुओं को दिक्कतें न हों।
पंडित भारत किशोर दुबे, सोरों।
- तीर्थनगरी के कांवड़ मेले का इतिहास काफी पुराना है। 600 वर्ष पुराना इतिहास तीर्थ पुरोहितों के पास दर्ज है। इससे पहले भी यहां कांवड़ भरी जाती थीं। कांवड़ मेले के लिए विशेष सुविधाएं होनी चाहिए।
डॉ. राधाकृष्ण दीक्षित, सोरों।
वर्जन
पालिका प्रशासन को पहले ही दिए जा चुके हैं निर्देश
कांवड़ मेला में व्यवस्थाओं के संबंध में नगरपालिका प्रशासन को पहले से ही निर्देशित किया जा चुका है। भक्तों को किसी तरह की दिक्कत न हो। मार्ग में प्रकाश, पेयजल आदि की व्यवस्था के भी इंतजाम कराए गए हैं।
-अजय कुमार श्रीवास्तव, एडीएम।
कासगंज के बाजार से गुजरतीं कांवड़ियों की टोली- फोटो : KASGANJ