आगरा के खेरागढ़ के एक गांव में दलित बालिका से दरिंदगी हुई। इसके बाद पुलिस और स्वास्थ्य विभाग ने भी पीड़िता का मेडिकल कराने और बयानों के नाम पर कम ज्यादती नहीं की। पुलिस ने उसे करीब साढ़े पांच घंटे थाने में बिठाए रखा, वहीं तीन घंटे मेडिकल के लिए बैठाने के बाद लेडी लायल से लौटा दिया गया। उधर सपा सांसद रामजीलाल सुमन जब पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे, तो एक सवाल के जवाब में उन्होंने विवादित बयान दे डाला।
18 अप्रैल की रात हुई दरिंदगी
खेरागढ़ में बालिका के साथ 18 अप्रैल की रात दरिंदगी हुई। पीड़िता के पिता 19 अप्रैल की सुबह 10 बजे थाना खेरागढ़ पहुंचे। पुलिस ने बालिका को थाने में लगभग साढ़े पांच घंटे जांच के नाम पर बिठाए रखा। पीड़ित परिवार बेहद गरीब है, इसके बाद भी मेडिकल कराने के लिए गाड़ी का इंतजाम करने के लिए कहा गया। किसी तरह उसने गाड़ी का इंतजाम किया। पुलिस लेडी लायल (जिला महिला अस्पताल) ले गई। यहां तीन घंटे तक वह इंतजार करती रही।
डॉक्टर ने कर दिया वापस
रात में डाक्टर नहीं होने की कहकर पीड़िता को वापस कर दिया गया। उसे अगले दिन सुबह 10 बजे आगरा दोबारा आने के लिए कहा गया। अगले दिन मेडिकल हुआ। सांसद राजकुमार चाहर का कहना है कि एक पीड़ित बच्ची के साथ पुलिस और फिर स्वास्थ्य महकमे की असंवेदनशीलता झकझोरने वाली है। पुलिस को ही पीड़िता को अस्पताल में भर्ती कराना चाहिए था। मेडिकल के लिए घंटों इंतजार करवाना कहां का न्याय है। सांसद राजकुमार चाहर ने इस पूरे मामले में डीएम से जांच करवाने और कार्रवाई के लिए निर्देशित किया है। डीसीपी अतुल शर्मा से भी दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।