मैनपुरी। जिला पंचायत राज विभाग के लिए ग्राम पंचायतों में होने वाले घोटाले जितनी बड़ी मुसीबत हैं, उससे कहीं बड़ी मुसीबत अब कार्रवाई में आने लगी है। कार्रवाई के बाद आरोपी न्यायालय से राहत पा जाते हैं। इसके बाद अब विभाग ने विधिक राय के बाद ही कार्रवाई का निर्णय लिया है।
ग्राम पंचायतों में वित्तीय अनियमितता और सरकारी धनराशि के गबन की शिकायतें आती हैं। शिकायत के आधार पर जांच समिति गठित कर दी जाती है। जांच रिपोर्ट में दोषी पाए जाने पर प्रधान के अधिकार सीज किए जाते हैं। वहीं सचिवों पर निलंबन या अन्य प्रशासनिक कार्रवाई की जाती है। बीते कुछ माह से प्रधानों पर की गई कार्रवाई पंचायत राज विभाग के लिए मुसीबत बन गई है। लगातार एक के बाद एक कार्रवाई के आदेश उच्च न्यायालय द्वारा स्थगित कर दिए गए हैं। इसके बाद विभाग ये जांचने में लगा है कि आखिर इन आदेशों में चूक कहां हुई। साथ ही विधिक राय के बाद ही कार्रवाई का भी निर्णय लिया गया है। जांच रिपोर्ट आने के बाद अब विधिक राय ली जाएगी कि कानूनी मामले में क्या कार्रवाई की जा सकती है, जिससे बाद में घोटालों को अंजाम देने वालों को न्यायालय से राहत न मिले।
केस एक
ग्राम पंचायत नौनेर में घोटाले की शिकायत हुई थी। दो बार हुई जांच में प्रधान और सचिव द्वारा घोटाला साबित हुआ। इसके बाद जिलाधिकारी ने ग्राम प्रधान स्मृता चौहान के अधिकार सीज कर दिए। लेकिन कुछ दिन पहले ही प्रधान की याचिका पर उच्च न्यायालय के अधिकार बहाल करने के आदेश दिए हैं।
केस दो
विकास खंड किशनी की ग्राम पंचायत शमशेरगंज उप निदेशक पंचायत राज को परीक्षण के लिए आवंटित थी। जांच हुई तो यहां लाखों का घोटाला मिला। यहां भी जिलाधिकारी ने प्रधान के अधिकार सीज कर दिए। उच्च न्यायालय ने यहां भी प्रधान की याचिका पर जिलाधिकारी का आदेश खारिज करते हुए अधिकार बहाल कर दिए।
ग्राम पंचायतों में घोटालों के मामले में जांच रिपोर्ट के आधार पर ही कार्रवाई की जाती है। उच्च न्यायालय से कई आदेश खारिज हुए हैं। इस कारण अब विधिक राय लेना जरूरी है, जिससे बाद में समस्या न हो।
स्वामीदीन, डीपीआरओ