धार्मिक स्थलों से लाउड स्पीकर हटाए जाने का फरमान शासन से मिलते ही प्रशासनिक अधिकारी सक्रिय हो गए हैं। आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद, मैनपुरी और एटा में इस आदेश की चर्चाएं आम हैं। धर्मस्थलों से जुड़े लोग फिक्रमंद नजर आ रहे हैं।
आगरा शहर में लगभग 7000 लाउडस्पीकर बताए जा रहे हैं। यह आंकड़ा धर्मस्थलों की संख्या के हिसाब से तैयार किया गया है। प्रशासन जल्द ही इन पर कार्रवाई करेगा। इससे पहले चेतावनी जारी की जाएगी। हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद प्रमुखसचिव गृह अरविंद कुमार का आदेश जिला प्रशासन को मिल गया है।
इसके आधार पर अब धार्मिक स्थलों से लाउडस्पीकर हटाने के लिए अभियान शुरू होगा। इसके लिए पुलिस विभाग का सहयोग लिया जाएगा। तहसीलवार ऐसे धार्मिक स्थल चिह्नित किए जाएंगे, जहां लाउडस्पीकर लगे हैं। इनका सभी का ब्यौरा एकत्रित किया जा रहा है।
जानकारी यह आई है कि लगभग सात हजार लाउड्सीपकर हैं। अपर जिलाधिकारी नगर केपी सिंह के अनुसार, शासन के आदेश का पूरी तरह से पालन कराया जाएगा। आदेश की प्रतिलिपि मिल गई है। इसके आधार पर ही अभियान की रूपरेखा तय की जा रही है। एडीएम सिटी का कहना है कि अगले सप्ताह से यह अभियान शुरू किया जाएगा। मगर, इससे पहले सभी को हाईकोर्ट के आदेश से अवगत कराते हुए उन्हें स्वयं ही धार्मिक स्थलों से लाउडस्पीकर उतार लेने का मौका दिया जाएगा।
ये कहा धर्मगुरुओं ने
नायब काजी उजैर आलम का कहना है कि यह बेहद प्रशंसनीय फैसला है। लोगों को खुद ही पहल करते हुए धर्मस्थलों से लाउडस्पीकर हटा लेने चाहिए ।
इस्लामियां लोकल एजेंसी के चेयरमैन हाजी असलम कुरैशी का कहना है कि शहर के इमाम और मुतवल्लियों ने भी हमसे जानकारी मांगी है। हम कोई भी कदम तभी उठाएंगे जब प्रशासन से किसी तरह का कोई आदेश आएगा। आईएलए शाही जामा मस्जिद समेत शहर की 38 मस्जिदों की देखरेख करती है।
नायब शहर काजी एवं मुतवल्ली रियासत अली का कहना है कि केवल मस्जिदों के लाउडस्पीकर ही प्रदूषण नहीं फैला रहे हैं। अजान तो केवल ढाई से तीन मिनट की होती है।
आगरा महाधर्मप्रांत के मीडिया प्रभारी फादर मून लाजरस का कहना है कि हाईकोर्ट का निर्णय स्वागत योग्य है। ध्वनि विस्तारक यंत्र से शोर ही पैदा होता है, लेकिन इस फैसले को लागू करने में किसी तरह की दुर्भावना नहीं होनी चाहिए।
तेज आवाज बनाती है बीमार
तेज आवाज कानों को नुकसान पहुंचाने के साथ ही कई तरह की बीमारियां भी दे रही है। इससे सिर दर्द, गुस्सा आना, बैचेनी रहना, नींद कम आने जैसी समस्याएं आम हैं।
ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. आलोक मित्तल बताते हैं कि सुनने के लिए आदर्श ध्वनि 90 डेसिबल है। इससे अधिक को शोर में शामिल किया जाता है। 150 डेसिबल आवास से कानों में सुनने की क्षमता प्रभावित होने लगती है। इससे ज्यादा आवाज में रहने पर अस्थायी तौर पर सुनाई देना बंद हो जाता है।
अन्य जिलों का हाल
कासगंज में 469 धर्मस्थलों पर बिना अनुमति के ही लाउडस्पीकर बज रहे हैं कोर्ट के निर्देश के बाद 469 धर्मस्थलों के अलावा, सैकड़ों की संख्या में मैरिज होम, धर्मशालाएं आदि भी कार्रवाई के घेरे में आ जाएंगे।
मैनपुरी में प्रमुख सचिव गृह का निर्देश मिलते ही अधिकारी एक्शन मोड में आ गए हैं। जिले की छोटी बड़ी 78 मस्जिदों तथा 438 मंदिरों का ब्यौरा जुटाने के लिए टीमें गठित कर दी गई हैं। गठित की गई टीम में राजस्व, पुलिस के साथ ही एक राजपत्रित प्रशासनिक अधिकारी को शामिल किया गया है।
मथुरा में भगवान श्रीकृष्ण की जन्म और लीला भूमि मथुरा में भी धार्मिक स्थलों पर सुबह शाम बजने वाले लाउडस्पीकरों का शोर है। भोर होते ही शहर और गांव में लाउडस्पीकर गूंजने लगते हैं। यहां करीब तीन हजार से अधिक धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर उपयोग किए जा रहे हैं, जिन्हें अब हटाया जाएगा।