आगरा के कोठी मीना बाजार का वही मैदान, जिस पर 10 साल पहले लोकसभा चुनाव में बसपा अध्यक्ष मायावती ने लोकसभा चुनाव में जिताने के लिए अपील की, तब मंच पर सांसद सीमा उपाध्याय और 6 विधायकों की भीड़ लगी थी। शनिवार को मैदान भी वही था, लेकिन मायावती के मंच पर न कोई सांसद, न विधायक। बसपा की राजनीतिक हैसियत कितनी बदली, इन 10 सालों में कोठी मीना बाजार मैदान के मंच ने बता दिया। 10 साल पहले का कोई चेहरा इस बार मंच पर नहीं था, सिवाय मायावती के।
शनिवार को आगरा में लोकसभा प्रत्याशियों के लिए वोट मांगने 10 साल के बाद बसपा अध्यक्ष मायावती कोठी मीना बाजार मैदान पर आई थीं। यह लंबा अंतराल इसलिए हुआ कि वर्ष 2019 के चुनाव में चुनाव आयोग ने उनके भाषण के आधार पर 48 घंटे का प्रतिबंध लगा दिया था, जिसके खत्म होने तक चुनाव प्रचार की समय सीमा ही खत्म हो गई। 16 अप्रैल 2019 को उनकी सभा आगरा में होनी थी, लेकिन उन पर प्रतिबंध के कारण गठबंधन के सहयोगी सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव, रालोद अध्यक्ष अजित सिंह, पार्टी नेता सतीश मिश्रा ही आए थे। इस तरह वह साल 2014 के बाद साल 2024 में ही लोकसभा चुनाव में वोट मांगने आई हैं।
विधानसभा चुनाव में करती रहीं प्रचार का आगाज
बसपा अध्यक्ष ने अपने हर विधानसभा चुनाव प्रचार का आगाज आगरा से किया है। साल 2007 हो या 2012, 2017 हो या 2022, सभी विधानसभा चुनाव में वह अपनी पहली रैली आगरा से ही करती रही हैं। हालांकि लोकसभा चुनाव में प्रचार के लिए रैली करने के लिए उन्हें 10 साल का इंतजार करना पड़ा।
मायावती को सोने का पहनाया मुकुट
बसपा की आगरा लोकसभा सीट से प्रत्याशी पूजा अमरोही, फतेहपुर सीकरी सीट से प्रत्याशी रामनिवास शर्मा और हाथरस के प्रत्याशी हेमबाबू धनगर ने बसपा अध्यक्ष मायावती को मंच पर सोने का मुकुट पहनाया। तीनों ने उनका अभिवादन किया और मंच पर उनके भाषण के दौरान हाथ जोड़कर खड़े रहे। भाषण समाप्त होने के बाद पूजा अमरोही ने बसपा अध्यक्ष के पैर छूकर आशीर्वाद मांगा। उन्होंने कुछ पलों के लिए उनसे चुनाव के बारे में पूछा और मंच से नीचे चली गईं।