फतेहपुरसीकरी लोकसभा क्षेत्र से सभी दलों ने प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं। पिछले चुनाव में भाजपा सांसद राजकुमार चाहर ने यहां से रिकॉर्ड मतों से जीत हासिल की थी। भाजपा ने एक बार फिर से उन पर ही दांव लगाया है, लेकिन इस बार सांसद चाहर के सामने जीत के लिए पांच बड़ी चुनौतियां भी हैं। पढ़ें धर्मेन्द्र यादव की ये स्पेशल रिपोर्ट...
उत्तर प्रदेश में रिकॉर्ड मतों से जीत हासिल करने वाले भाजपा प्रत्याशी का मुकाबला इस बार दिलचस्प हो सकता है। फतेहपुर सीकरी के विधायक के पुत्र ने भाजपा प्रत्याशी का विरोध शुरू कर दिया है। सोशल मीडिया पर मुहिम चलाने के साथ ही पंचायतें की जा रही हैं। वहीं संगठन ने अभी चुप्पी साध रखी है। इस सीट से टिकट की दावेदारी करने वाले पार्टी के अन्य नेता भी अलग-थलग नजर आ रहे हैं।
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फतेहपुर सीकरी सामान्य लोकसभा सीट पर टिकट के दावेदारों की संख्या इस बार सबसे ज्यादा थी। इस सीट पर मौजूदा सांसद राजकुमार चाहर ने करीब पांच लाख वोटों के अंतर से जीत हासिल की थी। उन्होंने कांग्रेस के सिने स्टार राजबब्बर को हराया था। इससे रातोंरात उनका नाम सुर्खियों में आ गया।
पार्टी ने सभी दावेदारों को दरकिनार करके उन पर भरोसा जताया। अब इस सीट पर पार्टी से जुड़े लोगों का भितरघात भारी पड़ सकती है। मौजूदा विधायक चौधरी बाबूलाल के पुत्र डॉ. रामेश्वर चौधरी के विरोध के स्वर थमे नहीं हैं। वह पंचायत करके बगावत का ऐलान भी कर चुके हैं। सोशल मीडिया ग्रुप चलाकर वह निरंतर भाजपा प्रत्याशी का विरोध कर रहे हैं। इस बगावत पर विधायक भी खामोश हैं। वह सिर्फ इतना कहते हैं कि मेरे बेटे से संंबंध नहीं हैं। वहीं कांग्रेस-सपा गठबंधन ने ठाकुर और बसपा ने ब्राह्मण प्रत्याशी पर दांव लगाकर अपने इरादे जता दिए हैं।
जाटलैंड कहलाने वाली फतेहपुर सीकरी में डॉ. रामेश्वर ने बगावत का बिगुल फूंक रखा है। पार्टी के विधायक और पूर्व विधायक सहित टिकट के कई दावेदार अब सीकरी के समर से दूर हट गए हैं। ऐसे में वह पार्टी के प्रत्याशी के लिए प्रचार करेंगे, इसमें संशय है।
पार्टी के भीतर चल रहे इस द्वंद्व से इस बार सीकरी सीट का मुकाबला त्रिकोणीय होना तय है। भाजपा जिलाध्यक्ष गिर्राज सिंह कुशवाह का कहना है कि चुनाव शुरू होने दें। संगठन के साथ सभी काम करेंगे।
26 साल पहले दूसरे नंबर पर रहे थे रामेश्वर
वर्ष 1998 में रामेश्वर सिंह ने तब रालोद का टिकट न मिलने पर बागी तेवर अपनाए और आगरा संसदीय क्षेत्र से निर्दलीय ही चुनाव मैदान में उतर गए। तब वह दूसरे नंबर पर रहे और बसपा के प्रत्याशी किशन लाल बघेल को तीसरे नंबर पर धकेल दिया। उन्हें निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में अब तक के चुनाव में सबसे ज्यादा वोट मिले। भाजपा प्रत्याशी भगवान शंकर रावत को 2.4 लाख और रामेश्वर सिंह को 1.91 लाख वोट मिले थे। अगले साल 1999 में हुए लोकसभा चुनाव में रालोद ने उन्हें मथुरा सीट से उतारा, जहां वह फिर दूसरे नंबर पर रहे और उन्हें मथुरा में 1.68 लाख वोट मिले। तब बसपा प्रत्याशी उपमन्यु तीसरे नंबर पर रहे थे।