जातीय समीकरण
वैश्य - 3.15 लाख, एससी - 2.80 लाख, मुस्लिम 2.70 लाख, ब्राहमण 1.60 लाख, बघेल 1.30 लाख, जाट 1.25 लाख, यादव 80 हजार, कुशवाहा 70 हजार।
आगरा के किले पर बदलते रहते हैं झंडे
1952 में आगरा दो सीटों में बंटा था-आगरा पूर्वी व आगरा पश्चिम। पश्चिम से कांग्रेस के रघुवर दयाल और पूर्वी से कांग्रेस के ही सेठ अचल सिंह जीते। 1957 में यह एक सीट हो गई। सेठ अचल सिंह 1952 से 1971 तक लगातार पांच बार जीते। 1977 में बीकेडी के शंभूनाथ चतुर्वेदी ने उन्हें जीत का छक्का लगाने से रोका।
इसके बाद आगरा के मतदाता लहर के साथ चले। 80 और 84 में कांग्रेस जीती। 89 में वीपी सिंह की लहर में जनता दल को विजय मिली। 1991, 1996 और 1998 में राम लहर में भाजपा ने हैट्रिक लगाई। 1999 और 2004 में सपा के राज बब्बर जीते जबकि 2009 में सुरक्षित सीट होने पर पहले सांसद बने भाजपा के रामशंकर कठेरिया। 2014 में वे 3 लाख से ज्यादा वोटों से जीते।
बसपा आज तक नहीं जीती यह सीट
बसपा इस सीट पर कभी जीत नहीं पाई, लेकिन इस बार हाथी अकेला नहीं है। सपा और रालोद भी साथ हैं। हालांकि बसपा के पूर्व विधायकों के दूसरे दलों में चले जाने से हाथी की राह थोड़ी मुश्किल हुई है। गठबंधन की ओर से एक ही बड़ी रैली हुई, जिसमें सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव, रालोद अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह आए, लेकिन चुनाव आयोग की पाबंदी के कारण बसपा अध्यक्ष मायावती शिरकत नहीं कर सकीं। कांग्रेस से ज्योतिरादित्य सिंधिया ने रोड शो किया।