जातीय समीकरण
राजपूत 3.20 लाख
ब्राह्मण 2.50 लाख
जाट 1.90 लाख
लोध-निषाद 1.85 लाख
कुशवाहा 1.25 लाख
मुस्लिम 70 हजार
वैश्य 70 हजार
स्टारडम राजनीतिक कौशल दांव पर
भाजपा के सामने जहां सीट बचाने की चुनौती है, वहीं राज बब्बर के स्टारडम व राजनीतिक कौशल की परीक्षा है। राज बब्बर राजनीति में नए नहीं हैं। दो बार आगरा और एक बार फिरोजाबाद से सांसद रह चुके हैं। बसपा मुकाबले को त्रिकोणात्मक बना रही है, लेकिन वेस्ट यूपी की अन्य सीटों की तरह गठबंधन की उतनी धमक नहीं दिखती। जाट व मुस्लिम बहुल किरावली में कंस मेला व दंगल के चलते आसपास से तमाम लोग आए हुए हैं। यहां जनरल स्टोर चलाने वाले गबरू खां कहते हैं, मुकाबला तो चाहर व बब्बर में है। किसी के भी सिर सेहरा बंध सकता है। उन्हें लगता है कि बसपा से सीमा उपाध्याय चुनाव लड़तीं तो तस्वीर दूसरी होती। कागरौल में क्लीनिक चलाने वाले डॉ. धर्मेन्द्र सोलंकी व राजबीर सोलंकी कहते हैं कि मोदी इफेक्ट के चलते भाजपा की बढ़त हैं। दूसरे नंबर पर राज बब्बर रहेंगे। यदि गठबंधन का प्रत्याशी लोकल होता, तो स्थिति दूसरी होती।
5 विधानसभा सीट सभी भाजपा के पास
फतेहपुर संसदीय क्षेत्र में पांचों विधानसभा सीट आगरा देहात, फतेहपुर सीकरी, खैरागढ़, फतेहाबाद और बाह पर भाजपा का कब्जा है।
चाहर को स्थानीय होने का लाभ
खैरागढ़ में एइला निवासी रामजीलाल सिकरवार बताते हैं कि भाजपा प्रत्याशी इसी क्षेत्र के कालियागढ़ी के निवासी हैं, नई उम्र के हैं। इसका उन्हें लाभ मिल रहा है। हालांकि बेरी चाहर निवासी एडवोकेट नितिन कुमार राज बब्बर की वकालत करते नजर आते हैं। मिष्ठान भंडार चलाने वाले तुलसी भी भाजपा व कांग्रेस में मुकाबला मानते हैं। ओमदत्त कहते हैं कि राज बब्बर राजनीतिक हैं, उनका ग्लैमर भी है, लेकिन वह 2009 में चुनाव हारने के बाद सक्रिय नहीं रहे। फतेहाबाद में गजेन्द्र शर्मा कहते हैं कि दूसरे-तीसरे नंबर पर जो भी रहे, मुकाबला भाजपा से है।