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'चुनाव में जाम कैसे बने मुद्दा..., नेताओं की गाड़ियां तो पुलिस निकलवा ही देती है'

Fri, 05 Apr 2019 02:43 PM IST
मुकेश कुमार पुनीत शर्मा, अमर उजाला, मथुरा
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जाम में फंसे वाहन - फोटो : अमर उजाला
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जनता चाहें कितना ही जाम-जाम चिल्ला लें। वाहनों की भीड़ में फंसकर सिस्टम को कोस लें। लेकिन होता कुछ नहीं। क्योंकि सियासी दल और प्रत्याशी तो इसे कोई मुद्दा मान ही नहीं रहे। किसी सभा से अराजक ट्रैफिक का जिक्र हो ही नहीं रहा। अब हो भी कैसे। यह जाम में फंसते भी तो नहीं। 
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सांसद, मंत्री और विधायकों की गाड़ियां तो पुलिस निकलवा ही देती हैं। लेकिन अगर हर रोज दफ्तर जाने वाले, स्कूल कॉलेज जाने वाले, मार्केट जाने वाले से पूछेंगे तो वो बताएगा कि वाकई सबसे बड़ा मुद्दा तो जाम ही है जो हर किसी को तनाव देता है। 

अमर उजाला ने जाम के झाम में फंसे लोगों से जब बात की तो सभी बेहद गुस्से दिखाई दिए। कहने लगे कि पार्टी कोई भी हो सभी हवाई बातें करती हैं। रोजमर्रा की जरूरतों और समस्याओं से तो किसी का लेना देना ही नहीं है।
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आगरा-दिल्ली हाईवे पर कोसीकलां में बाईपास तिराहे पर भी हर वक्त जाम जैसे हालात रहते हैं। हाईवे पर दौड़ने वाला ट्रैफिक यहां आकर रेंगने लगता है। हाईवे चौड़ीकरण का काम चल रहा है जो पूरा नहीं हो पाया है। जगह जगह खड़े होने वाले डग्गामार वाहनों ने भी हाईवे घेर रखा है। अतिक्रमण भी फैलकर सड़क तक आ गया है। 

कोसीकलां निवासी राहुल सिसौदिया, योगेश खंडेलवाल, भूदेव शर्मा, राजेश शर्मा और चंद्रप्रकाश का कहना है कि अगर रास्ते साफ हों तो लंबा सफर भी आसानी से कट जाता है। लेकिन जाम बहुत तनाव देता है। अगर आपको कहीं जल्दी जाना हो तो बड़ा मुश्किल हो जाता। कभी कभी तो इतना लंबा जाम होता है कि घंटों का वक्त हाईवे पर ही बीत जाता है।

मथुरा-अलीगढ़ मार्ग पर सबसे बड़ा जाम राया में ही लगता है। थाने के सामने से रेलवे क्रासिंग तक हजारों वाहन फंसे रहते हैं। वैसे तो अगर जाम न हो तो अपनी गाड़ी से राया को पार करने में मुश्किल से पांच मिनट लगेंगे लेकिन अब तो आधा घंटा और जाम ने विकराल रूप ले लिया तो एक घंटा लग जाता है।

राया के राकेश बंसल, डॉ. प्रद्युमन दीक्षित, मनोज चतुर्वेदी और आलोक अग्रवाल का कहना है कि जाम सबसे बड़ा मुद्दा है। हजारों लोग फंसते हैं। लेकिन सरकार कोई भी रही मगर किसी ने जाम का इंतजाम नहीं किया। क्योंकि मंत्री हो या बड़े नेता उनकी गाड़ियों के आगे तो पुलिस की जीप चलती है और वो रास्ता खाली करवा ही देती है। आम आदमी चाहें पूरा दिन जाम में फंसा रहे। 

मथुरा-भरतपुर मार्ग पर सबसे बड़ा जाम जाजनपट्टी से लेकर रारह के बीच में करीब पांच से छह किलोमीटर के दायरे में लगता है। जाम की सबसे बड़ी वजह एक साइड की सड़क बनाकर छोड़ देना है। दूसरी बड़ी वजह तीन संकरी पुलिया हैं। इन पुलिया पर निर्माण का काम बेहद सुस्त रफ्तार के साथ चल रहा है। 

जल सिंह मीणा, संदीप जैन, उदित गौड़, विकास गुप्ता, सुभाष ने बताया कि कभी कभी तो इतनी बुरी स्थिति हो जाती है कि निकल भी नहीं पाते। हालांकि सड़क पर काम चल रहा है लेकिन रफ्तार बेहद सुस्त है। जिस मुख्य पुलिया को बनाया जाना है उस पर तो अभी तक काम भी शुरू नहीं हो सका है।
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वृंदावन एक्सप्रेसवे लिंक मार्ग पर भी हर वक्त जाम रहता है। वृंदावन को एक्सप्रेसवे से जोड़ने वाला यह सिंगल मार्ग है। 8 किलोमीटर के इस मार्ग पर शनिवार और रविवार को तो हालात बेहद ही खराब हो जाते हैं। इस मार्ग को फोरलेन बनाने का प्रोजेक्ट है लेकिन अभी तक शुरू नहीं हो सका है। 

विवेक, गुलशन, प्रेम  सिंह, सुभाष और जगत सिंह का कहना है कि इस मार्ग पर तो निकलना भी मुश्किल हो जाता है। नेताओं की गाड़ियां भी निकलती हैं। लेकिन किसी का ध्यान इस तरफ नहीं जाता। अगर इस मार्ग को फोरलेन कर दिया जाए तो बड़ी समस्या का समाधान किया जा सकता है।
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