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मुलायम के 'आखिरी चुनाव' में भाजपा का कड़ा इम्तिहान, यहां अब तक नहीं खिल पाया 'कमल'

Mon, 22 Apr 2019 03:04 PM IST
Vikas Kumar नीलेश शर्मा, अमर उजाला, मैनपुरी
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एक साथ आए मायावती और मुलायम सिंह यादव - फोटो : पीटीआई
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सपा के सबसे मजबूत किले मैनपुरी में भाजपा एक बार फिर छटपटाती नजर आ रही है। सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव ने इसे अपना आखिरी चुनाव बताकर भाजपाई खेमे का तनाव बढ़ा दिया है। मैनपुरी उस ऐतिहासिक सियासी घटनाक्रम का गवाह होकर और खास हो गया, जब 24 साल की तल्खी भुलाकर मायावती और मुलायम ने यहां रैली में मंच साझा किया।

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माया ने गठबंधन प्रत्याशी मुलायम के लिए वोट मांगे। दूसरी ओर, भाजपा उम्मीदवार प्रेम सिंह शाक्य परंपरागत वोटरों के भरोसे मोदी की माला जप रहे हैं। उनकी उम्मीदें सिर्फ मोदी के नाम के चमत्कार पर टिकी हैं। यह अलग बात है कि 2014 की मोदी लहर में भी मुलायम की बड़ी जीत हुई थी। मुलायम के सीट छोड़ने पर उप चुनाव में सपा के तेज प्रताप ने प्रेम सिंह शाक्य को हराया था।  

मुलायम सिंह यादव को यादव वोट के साथ ही गठबंधन के समीकरण और अपनी पकड़ पर भरोसा है। कांग्रेस ने मुलायम के सामने उम्मीदवार नहीं उतारा है। आखिरी चुनाव की दुहाई देकर वह जनता से भावनात्मक रिश्ता बनाने की कोशिश में हैं। वहीं सपाई 19 अप्रैल को क्रिश्चियन मैदान में गठबंधन की साझा रैली में उमड़ी भीड़ देखकर भी गदगद हैं। 

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चार बार चुनाव जीत चुके हैं मुलायम 

मैनपुरी सीट पर 1996 से सपा का कब्जा है। सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव यहां से चार बार सांसद चुने गए। मैनपुरी से ही मुलायम के भतीजे धर्मेंद्र यादव 2004 के उपचुनाव में जीत हासिल करके संसद पहुंचे। 2014 के उपचुनाव में सपा संरक्षक के पौत्र तेजप्रताप यादव ने यहां से जीत दर्ज की। मुलायम सिंह ने 1996, 2004, 2009 और 2014 में मैनपुरी संसदीय क्षेत्र से जीत हासिल की। 1998 और 1999 में सपा के ही बलराम सिंह यादव यहां से जीते। 

मोदी-शाह नहीं आए रैली करने 

मैनपुरी संसदीय सीट के समीकरण अपने पक्ष में मोड़ने के लिए भाजपाई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की रैली चाहते थे। संगठन ने दोनों नेताओं का समय भी मांगा, लेकिन मिला नहीं। उन्हें उम्मीद थी कि प्रधानमंत्री या फिर अमित शाह की जनसभा से यहां के समीकरणों में भाजपा के पक्ष में बदलाव होगा। मैनपुरी में सबसे बड़े नेता के रूप में अब तक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ही जनसभा हुई है। इस सीट पर अभी तक भाजपा का खाता नहीं खुल पाया है। 
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