चौथी लोकसभा के लिए हुए आम चुनाव में विदेशी धन का इस्तेमाल हुआ था। कांग्रेस की सरकार बनने के बाद संसद में भी यह मुद्दा उठा और विपक्ष ने इसे लेकर खूब हंगामा किया। तब के गृह मंत्री यशवंत राव चव्हाण को भी संसद में चुनाव में विदेशी धन के प्रयोग की बात स्वीकार करनी पड़ी।
चुनाव खर्च की सीमा समय-समय पर बढ़ती रही है। भारतीय प्रतिनिधित्व कानून 1951 की धारा 77 के तहत प्रत्येक उम्मीदवार को नामांकन से चुनाव परिणाम की तिथि तक अपने खर्चे का पूरा ब्योरा रखना जरूरी है।
अमर उजाला के 14 दिसंबर, 1967 के अंक में प्रकाशित समाचार के अनुसार तत्कालीन गृहमंत्री यशवंत राव चव्हाण ने राज्यसभा में माना था कि उनके पास इस बात पर विश्वास करने के पर्याप्त आधार हैं कि चुनाव में विदेशी धन का इस्तेमाल हुआ।
साथ ही उन्होंने कहा था कि यह पता लगाना संभव नहीं है कि धन कहां से आया और किस पार्टी ने इसका प्रयोग किया। गृह मंत्री ने इस पर संसदीय समिति के गठन का प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया।