आगरा के सिकंदरा क्षेत्र में होली पब्लिक स्कूल के सामने 500 साल पुरानी लोदीकालीन मस्जिद बारिश के कारण 300 दिन पहले ध्वस्त हो गई थी। तब से अब तक इसका मलबा वहीं पड़ा है। इन 300 दिनों में राज्य पुरातत्व विभाग, प्रशासन और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण लोदीकालीन मस्जिद की मरम्मत और मलबा हटाने की जिम्मेदारी तय नहीं कर सके।
मस्जिद के तीन में से दो गुंबद ढह चुके हैं। बाकी बचे एक गुंबद में एक परिवार ने शरण ले रखी है, जो उनकी जान के लिए खतरनाक है। कभी भी तीसरा गुंबद भी गिर सकता है। मस्जिद को एडॉप्ट हेरिटेज योजना के तहत चुना गया था, लेकिन संरक्षण नहीं किया गया। ककैया ईंटों और चूने से बनी इमारत का एक ही गुंबद बाकी है, जो कभी भी गिर सकता है।
ताजमहल के पूर्व संरक्षण सहायक डॉ. आरके दीक्षित के मुताबिक यह लोदीकालीन वास्तुकला की धरोहर है। आगरा में केवल दो इमारतें ही लोदीकालीन बची थीं, इनमें से एक ढह गई है। इसे संरक्षित करने की जरूरत है। गाइड एसोसिएशन अध्यक्ष शमशुद्दीन ने बताया कि ध्वस्त होने के बाद इस धरोहर को बचाने के लिए राज्य पुरातत्व विभाग को पत्र भेजा गया, लेकिन उनका कोई जवाब नहीं आया। प्रशासन 500 साल पुरानी इस धरोहर को बचाए।