वृंदावन (मथुरा)। देश के कई प्रदेशों से ठाकुर बांकेबिहारी की नगरी में आए 4600 लोग अभी तक फंसे हैं। लॉकडाउन के चलते फंसे यह लोग सड़कों पर रहने को मजबूर हैं या फिर कई आश्रम और धर्मशाला में डेरा डाले हैं। कोई मजदूर है तो कोई दर्शन के लिए वृंदावन आया था। अब इन लोगों को अपने घर की याद सता रही है। यह लोग अपने घर सुरक्षित जाना चाहते हैं, पर जिला प्रशासन इनकी सुध तक नहीं ले रहा है।
अब सवाल खड़ा होता है कि आखिर जिला प्रशासन इन फंसे लोगों को अभी तक सुरक्षित घरों तक क्यों नहीं पहुंचा पाया? ऐसे कई सवाल जिला प्रशासन की हीलाहवाली को साफ उजागर करते हैं। यहां फंसे सभी लोग अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से घर जाने की गुहार लगाने की तैयारी कर रहे हैं।
फरवरी में काम से आए, लॉकडाउन में फंसे
17 फरवरी को कार्य से वृंदावन आए थे। गांधी पार्क के सामने धर्मशाला में रुके। इसी बीच लॉकडाउन हो गया तो यहां फंस गए। धर्मशाला से कमरा खाली करा लिया गया तो सड़क पर रहने को मजबूर हैं। अब अपने घर दिल्ली जाना चाहते हैं।
- सुशांत कुलश्रेष्ठ, इंटीरियर डिजाइनर
सड़क पर रहने को मजबूर, जाना चाहते हैं घर
गेस्ट हाउस में सुपरवाइजर की नौकरी कर रहा था। लॉकडाउन के कारण नौकरी तो चली गई, अब ठिकाना भी नहीं रहा। मोतीझील मार्ग पर सड़क किनारे पटरी पर रहने को मजबूर हैं। अपने घर दमोह (मध्यप्रदेश) जाकर बच्चों से मिलने की इच्छा है।
-सुनील मेहवाल, गेस्ट हाउस सुपरवाइजर
मजदूरी के लिए वृंदावन आया, घर जाने की इच्छा
मजदूरी करने के लिए वृंदावन आया। लॉकडाउन के कारण यहां फंसकर रह गया। परिवार के 10 लोगों के साथ किराए पर रहने को मजबूर हैं। घर मध्यप्रदेश के टीकमगढ़ जाने की इच्छा है, पर कोई इंतजाम नहीं हो रहा।
-मनोहर, मजदूर
दर्शन को आया तो लॉकडाउन में फंसा
ठाकुर बांकेबिहारी के लिए दर्शन के लिए वृंदावन अपने मित्रों के संग आया। क्या पता था कि लॉकडाउन में फंस जाएंगे। अब केवल सड़कों पर रहने को मजबूर हैं। अपने घर मध्य-प्रदेश के दमोह जाना चाहते हैं। घर की याद सता रही है।
-कोमल, श्रद्धालु
वृंदावन में फंसे हैं 4600 लोग
वृंदावन में करीब 4600 लोग फंसे होंगे। हालांकि इन लोगों को खाने की कोई दिक्कत नहीं है। जिला प्रशासन जैसा आदेश करेगा, इन सभी को भेजने का इंतजाम करवाया जाएगा।
- संजीव कुमार दुबे, कोतवाल