लॉकडाउन में मुसीबतों को बोझ लेकर पैदल चल रहे लोगों के लिए सरकार ने रोडवेज की बसें लगाई हैं, लेकिन बस चालक और परिचालक वसूली करने लगे। आगरा के ईदगाह बस अड्डे पर शनिवार ऐसा ही मामला सामने आया है।
दोपहर दो बजे यहां तकरीबन 600 यात्रियों का जमावड़ा लगा हुआ था। दो बसें झांसी जाने के लिए खड़ी थीं। तभी 25 से ज्यादा यात्रियों का कहना था कि परिचालक 440 रुपये किराया मांग रहा है, जबकि किराया 240 रुपये है।
चार से पांच परिवार ऐसे भी थे, जिनके पास किराए का पैसा नहीं था। उनका कहना था कि पैदल 300 किलोमीटर का सफर तय कर चुके हैं, अब कुछ नहीं बचा है। सरकार हमें घर तक भिजवाए।
किराया कहां से दें, जेब में पैसा नहीं
ललितपुर के रहने वाले संतोष कुमार ने बताया कि गुरुग्राम में मजदूरी करते थे। पांच दिन से लगातार पैदल चलकर यहां तक पहुंचे हैं। जो कुछ कमाया था खर्च हो गया। अब घर तक पहुंचना है। किराये का पैसा भी नहीं है, लेकिन परिचालक बैठने नहीं दे रहा है।
झांसी की कलावती ने कहा कि बस का परिचालक 440 रुपये मांग रहा है, झांसी का किराया इतना ज्यादा नहीं लगता है। कोई यहां सुनवाई करने वाला नहीं है। अब बस भेजी हैं तो किराया इतना ज्यादा मांग रहे हैं। कहां से दें।
यात्री चंद्रभान ने बताया कि जयपुर के लिए बस में बैठा तो परिचालक ने 320 रुपये मांगे। अब ये लोग किस हिसाब से किराया ले रहे हैं। हम तो वैसे ही परेशान हैं। अधिकारियों को देखना चाहिए।
पैदल सफर करके लौटे बस मिली तो किराया खत्म
यह सभी लॉक डाउन के बाद दिल्ली, पलवल, गुरुग्राम से पैदल अपने घरों को जाने को निकले थे। इनमें से कई परिवार ऐसे थे, जोकि रास्ते में जहां जैसे मिला, वैसा खाते-पीते आ रहे थे। उनके पास अब पैसा नहीं बचा है।
ऐसे में उन्हें उम्मीद थी कि बसों में किराया नहीं लिया जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। वह बेहद परेशान नजर आए। ऐसे यात्रियों में महीपाल, राजू, विनोद, कैलाश, निजाम, बीना आदि सैकड़ों लोग थे।
शिकायत पर पैसा वापस कराया
चूंकि ईदगाह से झांसी रूट की बसें नहीं चलती हैं, इसलिए किराये में कोई असमंजस हुआ होगा। झांसी का किराया प्रति सवारी 240 रुपये लिया गया है। हमें शिकायत मिली तो बाद में सवारियों को पैसा वापस करवाया गया। सभी तरह की शिकायतों पर हम एक्शन ले रहे हैं। - एसपी सिंह, सेवा प्रबंधक, परिवहन निगम आगरा परिक्षेत्र