लॉकडाउन में आगरा की सभी फैक्टरियां, प्रतिष्ठान, दुकानें, होटल, स्मारक, ट्रांसपोर्ट के साधन बंद पड़े हैं। 21 दिनों के लॉकडाउन में जिले के 2.25 लाख दैनिक कामगारों की रोजीरोटी पर संकट खड़ा हो गया है।
सबसे ज्यादा रोजगार देने वाले फुटवियर और पर्यटन उद्योग से जुड़े लोगों के सामने बड़ी चुनौती है। जो कामगार रोल पर हैं, उन्हें तो वेतन देने के आदेश हैं, लेकिन कॉन्ट्रैक्ट बेस्ड और दिहाड़ी मजदूरों की मुश्किलें ज्यादा हैं।
5200 के एकाउंट में आएंगे 1000 रुपये
श्रम विभाग और मनरेगा में दर्ज कामगारों के अलावा एक हजार रुपये की आर्थिक मदद के लिए आवेदन करने वालों की संख्या संख्या 5200 है। नगर निगम में उन्होंने आवेदन किए हैं।
कई के बैंक खातों में 1000 रुपये ट्रांसफर हो गए। जूता कारीगरों को आगरा फुटवियर मैन्यूफैक्चरर्स एक्सपोर्टर्स चैंबर (एफमेक) ने वेतन देने की घोषणा पहले ही कर दी थी। लेकिन सबसे ज्यादा परेशानी में दिहाड़ी मजदूर हैं।
ये हैं आंकड़े
- 80,000 फुटवियर से जुड़े हैं
- 40,000 हेंडीक्राफ्ट से जुड़े
- 36,000 दुकानों पर काम करने वाले
- 3500 स्मारकों के गाइड
- 3000 स्मारकों पर फोटोग्राफर
- 5500 आभूषण निर्माण से जुड़े
- 30,000 होटल, रेस्टोरेंट से जुड़े
- 8000 ऑटो, ई रिक्शा, ड्राइवर
- 5500 दीवानी, कलेक्ट्रेट से जुड़े
गोलगप्पे, चाऊमीन, मोमोज की जगह सब्जी
लॉकडाउन में शहर की गलियों में सब्जी विक्रेताओं की संख्या बढ़ गई है। दरअसल, अब तक जो लोग चौराहों पर गोलगप्पे, चाऊमीन, मोमोज आदि की ढकेल लगाकर गुजारा कर रहे थे।
उन्होंने लॉकडाउन में सब्जी और फल बेचना शुरू कर दिया है। जिला उद्योग केंद्र की उपायुक्त अंजू रानी ने बताया कि लॉकडाउन में कंपनियों को वेतन देना होगा। कोई कटौती नहीं होगी।
पैकेज के लिए मुख्यमंत्री को लिखा पत्र
आगरा शू फैक्टर्स फेडरेशन के अध्यक्ष गागन दास रमानी ने मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में व्यापारियों के लिए राहत पैकेज मांगा है। कहा है कि लॉकडाउन की अवधि में व्यापारी को कर्मचारियों की तनख्वाह, बिजली व पानी के बिल, दुकान का किराया, परिवार के भरण-पोषण के लिए पैसा चाहिए। सरकार व्यापारी और कामगारों के लिए राहत पैकेज दे।
हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष रजत अस्थाना के मुताबिक लॉकडाउन का सबसे बुरा असर कारीगरों और शिल्पियों के ऊपर पड़ा है। एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर राहत पैकेज की मांग की है ताकि शिल्पकारों को रियायत और राहत दी जा सके।
जिस तरह दिहाड़ी मजदूरों के लिए 1000 रुपये दिए जा रहे हैं, उसी तरह शिल्पियों और हैंडीक्राफ्ट से जुड़े लोगों को पांच हजार रुपये की सहायता दी जाए।