दोपहर करीब 12 बजे रहे थे। सिर पर सूरज चढ़ा हुआ था। रुई की मंडी मार्ग के किनारे मटके रखकर बैठी वृद्धा शांति देवी ग्राहकों का इंतजार कर रही थी। घंटों बीतने के बाद भी उसकी मिट्टी का मोल लगाने वाले कोई नहीं आया।
लॉकडाउन में अमर उजाला ने मंगलवार को विभिन्न क्षेत्रों में जाकर कुम्हारों की स्थिति देखी। चटक गर्मी के बावजूद उनके द्वारा मेहनत से बनाए गए सामान को खरीदने वाला कोई नहीं था। इधर, पुलिस की सख्ती अलग से परेशान कर रही थी।
कुम्हारों ने बताया इस संकट को एक माह से ज्यादा बीत चुका है। लगातार आर्थिक स्थिति खराब होती जा रही है। बड़ा परिवार है। 10 रुपये सैकड़े पर कर्ज लेकर गुजारा करना पड़ रहा है। पीढ़ियों ने ऐसा संकट नहीं देखा। जबकि इस सीजन में फुरसत नहीं मिलती थी।