फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Lockdown In Agra: एक माह से काम बंद, टैक्सी चालकों के सामने गृहस्थी चलाने का संकट

Wed, 22 Apr 2020 12:30 PM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
विज्ञापन
demo pic
विज्ञापन
पर्यटन नगरी में ओला-उबर से संबद्ध टैक्सी चालकों के सामने लॉकडाउन में मुसीबतें बढ़ गई हैं। तकरीबन एक माह से काम बंद पड़ा है। इस कारण उन्हें गृहस्थी चलाने और गाड़ी की किस्त चुकाने में परेशानी हो रही है। यही हाल प्राइवेट टैक्सी संचालकों का है।
विज्ञापन


आगरा कैंट व आगरा फोर्ट स्टेशनों से ही रोजाना 500 टैक्सियां संचालित होती हैं। इन सभी को लॉकडाउन में ढील का इंतजार है। शहर में ओला, उबर की लगभग 400 टैक्सियां संचालित हैं।

इन दोनों ही कंपनियों की ओर से स्थायी चालकों को हर्जाना दिया गया है, लेकिन एक हजार से अधिक ऐसे भी टैक्सी चालक हैं, जोकि ओला के लिए टैक्सी चलाते हैं, लेकिन गाड़ियां उनकी निजी है। यह संबद्ध टैक्सी चालक कहलाते हैं। इन्हें कंपनी की ओर से भी कोई भुगतान नहीं हो पा रहा है। ऐसे में इन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
विज्ञापन

 

कर्ज लेकर खरीदी थी गाड़ी
किसी तरह कर्ज लेकर गाड़ी खरीदी थी। ओला से संपर्क इसलिए किया ताकि काम आसानी से मिल जाए। अब करीब एक माह से घर में बैठे हैं। गाड़ी की ईएमआई भी चुकानी है। ऐसे में हम लोगों को कोई राहत नहीं मिली है। - मेघराज, टैक्सी चालक, ओला 

मरीजों को लाने का मिले काम

गाड़ी पार्टनरशिप में खरीदी थी। ओला उबर से संपर्क किया था। अब एक माह से लॉकडाउन में सभी तरह की सेवाएं बंद हैं। कम से कम हॉस्पिटलों तक मरीजों को लाने का काम ही दे दिया जाए। रोजी रोटी तो शुरू हो जाएगी।- रामसेवक, टैक्सी चालक

सरकार को देनी चाहिए मदद

सरकार को ई रिक्शा चालकों की तर्ज पर हम टैक्सी वालों को भी मदद देनी चाहिए। कंपनी तो केवल अपने रेग्यूलर चालकों को ही मदद दे रही है। समस्याएं बढ़ने लगी हैं। ईएमआई भी देनी होगी। सरकार ने इसमें भी कोई राहत नहीं दी है। -शाहिद हुसैनी, टैक्सी चालक
 
विज्ञापन

फरवरी से ही काम ठप हो गया
चीन में वायरस के फैलने के बाद से ही विदेशों से पर्यटकों की आमद में कमी आ गई थी। इसके बाद मार्च में तो सभी के सामने परेशानियां पैदा हो गईं। आगरा कैंट से प्रतिदिन एक हजार ऑटो व टैक्सी चलती हैं। अब इस वर्ग के लिए समस्याएं बढ़ गई हैं। आरटीओ को टैक्स भी माफ करना चाहिए। - अनिल शर्मा, अध्यक्ष, निजी टैक्सी व आटो एसोसिएशन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें